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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2023

सिर्फ शादी करने से एसटी का दर्जा पाने का हक नहीं कोर्ट

 सिर्फ शादी करने से एसटी का दर्जा पाने का हक नहीं कोर्ट

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सेवा संबंधी एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दोहराते हुए कहा है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्ति से शादी करने मात्र से किसी को इस वर्ग का स्टेटस नहीं प्राप्त हो जाता।यह टिप्पणी न्यायामूर्ति राजन रॉय की एकल पीठ ने लक्ष्मी तोमर की याचिका पर पारित आदेश में की। याची का कहना था कि उसके माता-पिता सामान्य वर्ग से थे लेकिन उसका विवाह अनुसूचित जाति वर्ग में हुआ था, लिहाजा पति की जाति के आधार पर उसे भी अनुसूचित जाति वर्ग का प्रमाण पत्र मिल गया। कहा गया कि वह एफसीआई में असिस्टेंट ग्रेड 2 पर नौकरी कर रही थी । 


हालांकि जाति संबंधी उसके प्रमाण पत्र को न मानते हुए, एफसीआई ने उसे असिस्टेंट ग्रेड 3 पर पदावनत कर दिया। अपने खिलाफ पारित उक्त दंडात्मक आदेश को याची ने चुनौती दी थी। न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के उपरोक्त आदेश को दोहराते हुए कहा कि हालांकि याची के निलम्बन अवधि को उसके बिना वेतन के सेवा काल में जोड़ा जाना चाहिए।

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