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रविवार, 26 फ़रवरी 2023

RTI : पांच साल में आवेदन दोगुने, तीन साल से फीस प्रतिपूर्ति शून्य, बच्चों को नहीं मिली स्टेशनरी की राशि

 

RTI : पांच साल में आवेदन दोगुने, तीन साल से फीस प्रतिपूर्ति शून्य, बच्चों को नहीं मिली स्टेशनरी की राशि

आरटीई के तहत स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन का आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में दोगुना पहुंच गया है। शुरुआती दो साल छोड़ दें तो पिछले तीन साल से सरकार ने निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति के रूप में एक रुपये भी नहीं दिया है।इसे लेकर निजी स्कूल संचालकों में गहरा आक्रोश है। ऐसे में इस बार के दाखिलों में अभिभावक, स्कूल और सरकार के बीच खींचतान बढ़ने की आशंका है।दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को उनकी पसंद के निजी स्कूल में दाखिला देने की मंशा से लागू निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत दाखिले का ग्राफ हर साल बढ़ता जा रहा है।आरटीई के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर बाकी सभी स्कूलों को उनके यहां की 25 फीसदी सीटों पर दुर्बल आय वर्ग के बच्चे को निशुल्क दाखिला देना होता है। दाखिले के बाद फीस प्रतिपूर्ति राज्य सरकार को करनी होती है।


निजी स्कूल में निशुल्क दाखिले के लिए अभिभावकों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। बीएसए आवेदनों की जांच करने के बाद सत्यापित करता है कि बच्चा दाखिले के लिए अर्ह है या नहीं। इसके बाद लॉटरी के द्वारा बच्चों को स्कूलों का आवंटन होता है।आवंटन पत्र मिलने के बाद अभिभावक संबंधित स्कूल में जाकर दाखिला ले लेते हैं। पिछले तीन साल से स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की रकम नहीं मिल रही है। इस वजह से निजी स्कूल दाखिला देने में आनाकान करते हैं। इस समय आरटीई के दाखिलों की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चल रही है। लॉटरी निकलने के बाद दाखिले का नंबर आएगा। फीस प्रतिपूर्ति पर स्थिति साफ न होने पर बच्चों के दाखिलों पर संकट गहरा सकता है।


बच्चों को नहीं मिली स्टेशनरी की राशि

आरटीई अधिनियम के शासनादेश में हर बच्चे को पांच हजार रुपये की धनराशि स्टेशनरी और बैग आदि के लिए मिलनी है। यह राशि भी पिछले तीन साल से जारी नहीं हुई है। ऐसे में अभिभावक जैसे-तैसे बंदोबस्त कर स्टेशनरी की व्यवस्था कर रहे हैं।


RTI : पांच साल में आवेदन दोगुने, तीन साल से फीस प्रतिपूर्ति शून्य, बच्चों को नहीं मिली स्टेशनरी की राशि Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP BASIC NEWS

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