UPSESSB: तो निश्चित मानदेय पर रखे जाएंगे एडहाॅक शिक्षक, वेतन विवाद का हल निकालने के लिए प्रस्ताव तैयार
लखनऊ : एडेड इंटर कॉलेजों में तदर्थ (एडहॉक) शिक्षकों के विवाद का हल निकालने के लिए सरकार अब इनको नियत मानदेय पर रखने की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। जल्द ही कैविनेट की मंजूरी के बाद मानदेय पर रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। एडेड इंटर कॉलेजों में टीजीटी और पीजीटी परीक्षा के जरिए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड शिक्षकों की भर्ती करता है। कई वार भर्तियों में विलंब होने या किसी वजह से भर्तियों में देर होने की वजह से खाली पदों पर प्रबंधन अपने स्तर से भर्तियां कर लेता है।
ऐसे तदर्थ शिक्षक समय-समय पर भर्ती होते रहे। सामान्य शिक्षक की तरह इनका वेतन भी मिलने लगता है। वाद में इन भर्तियों पर विवाद होता है और कोर्ट में मामला पहुंच जाता है। विवाद बढ़ने पर सरकार ने रास्ता निकालते हुए ऐसे शिक्षकों को नियमित भी किया। शिक्षक संघों की मांग पर अगस्त 1993 दिसंबर 2000 तक के तदर्थ शिक्षकों को नियमित भी किया गया, उनका तव से वेतन मिल रहा है।
वेतन को लेकर बढ़ा विवाद: नियमितीकरण की तारीख के बाद भी विद्यालय प्रबंधन शिक्षकों की भर्ती करते रहे। ऐसे ही कई शिक्षक वेतन के लिए वाद में कोर्ट पहुंचे। इसमें हाई कोर्ट ने समय-समय पर अलग-अलग फैसले दिए। उसके बाद करीब दो साल पहले मामला कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने तदर्थवाद को खत्म करने के आदेश दिए। यही वजह है कि कई जिलों में डीआईओएस ने तदर्थ शिक्षकों के वेतन रोक दिए। वेतन रोके जाने का मुद्दा पिछले दिनों विधान परिषद में उठा था और शिक्षक संघों ने प्रदर्शन भी किए थे। इस वारे में शिक्षकों का कहना है कि जो तय प्रक्रिया से सरकार ने नियमित किए हैं. उनके वेतन पर रोक नहीं है। माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट के प्रदेश प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी कहते हैं कि अगस्त 1993 दिसम्बर 2000 तक नियुक्त शिक्षकों को चयन वोर्ड नियमावली और शासन की तय प्रक्रिया के तहत नियमित किया गया है। इनका वेतन नहीं रोका जा सकता।
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रिटायरमेंट तक मिलेगा निश्चित मानदेय
इन्हीं विवादों को खत्म करने के लिए सरकार तदर्थ शिक्षकों को नियत मानदेय पर रखने जा रही है। रिटायरमेंट तक उनको सामान्य शिक्षकों के समकक्ष ही तय वेतन मिलेगा लेकिन अन्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी। वे नियमित शिक्षकों के समकक्ष नहीं माने जाएंगे। प्रस्ताव पर शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है।

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