शिक्षा विभाग : स्कूल के निरीक्षण के बाद ऑनलाइन ही रिपोर्ट दे सकेंगे निरीक्षण में अधिकारियों की नहीं चलेगी मनमर्जी एप के जरिए ही हर माह मिलेगी विद्यालयों की सूची
शिक्षा विभाग ने राजकीय विद्यालयों के निरीक्षण को प्रभावी बनाने के लिए शाला संबल योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब शिक्षा अधिकारी अपनी मर्जी से किसी भी स्कूल का निरीक्षण नहीं कर सकेंगे। उन्हें हर महीने स्कूलों के नाम की एक सूची मिलेगी, उन्हीं का ही निरीक्षण करना होगा। साथ ही निरीक्षण रिपोर्ट भी ऑनलाइन एप के जरिए ही विभाग को बिंदुवार देनी होगी। इससे वास्तविक समय पर ही रिपोर्ट तैयार हो जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों के निरीक्षण को प्रभावी बनाने के लिए शाला संबल एप का नया वर्जन भी जारी कर दिया गया है। इस एप के माध्यम से ही प्रशासनिक व शिक्षा अधिकारियों को निरीक्षण करने होंगे। यह बदलाव संभाग, जिला व ब्लॉक तीनों स्तर के निरीक्षणों के लिए लागू किया गया है। इसके साथ ही मार्च महीने में शिक्षा अधिकारियों को 8-8 विद्यालयों के निरीक्षण करने होंगे। वहीं आरपी स्तर के अधिकारियों को 12-12 स्कूलों के निरीक्षण का लक्ष्य दिया जा चुका है।
बदलाव का बड़ा कारण: विद्यालयों की दशा में सुधार के लिए दे सकेंगे टिप्स
जिले के सरकारी विद्यालयों के निरीक्षण के लिए लागू की गई नई व्यवस्था में संभाग, जिला, ब्लॉक, पंचायत व सीआरसी स्तर के अधिकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे। इससे विद्यालय के कमजोर व मजबूत बिंदुओं की मौके पर जानकारी मिलेगी। इसमें सुधार के लिए निरीक्षण अधिकारी विद्यालय स्टाफ को सुझाव देकर सुधार करवा सकते हैं। साथ ही विद्यालय के स्टाफ, शिक्षा व कार्यों की गुणवत्ता जांच हो सकेगी। शिक्षण प्रक्रिया व गतिविधियों के साथ विद्यालय की भौतिक व शैक्षिक स्थिति की भी जानकारी मिल सकेगी।
रिपोर्ट अपलोड करने में होगी आसानी, मोबाइल एप मिलेगा
शाला संबल अभियान के लिए नए एप में काफी सारी सुविधा दी गई है। इससे निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को काफी राहत मिलेगी। इसमें निरीक्षण फार्म को सरल करते हुए अधिक प्रभावी वर्जन तैयार किया गया है। नए वर्जन में निरीक्षण प्रपत्र में जरूरी सवालों को शामिल किया गया। इसके साथ ही जो सूचनाएं शाला दर्पण पोर्टल पर हैं, उनको शामिल नहीं किया गया है। नए वर्जन से विद्यालय निरीक्षण रिपोर्ट में 25 से 30 मिनट का ही समय लगेगा। इसके साथ ही अकादमिक प्रक्रिया, लर्निंग आउटकम की जांच के साथ विद्यालय से संबंधित विभिन्न जानकारियों के डाटा संग्रहण व विश्लेषण को प्रभावी बनाया जा सकेगा।
अभियान में पहले शिक्षा अधिकारी खुद ही तय करते थे विद्यालय, अब उन्हें आवंटित होंगे
शिक्षा विभाग के संबल अभियान में पहले शिक्षा विभाग के अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी खुद ही निरीक्षण का कार्यक्रम तय करते थे और स्कूलों का चयन भी खुद ही कर रहे थे। इसमें निरीक्षण को लेकर विभाग को कई बार शिकायतें मिली हैं। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने इस योजना में बदलाव किया है। इसमें जिले के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, डीईओ प्रारंभिक व माध्यमिक, एडीईओ, समग्र शिक्षा अधिकारी, पीओ, डाइट प्राचार्य व व्याख्याता, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी व आरपी को एप के जरिए ही निरीक्षण वाले विद्यालयों की लॉगइन के साथ ही जानकारी मिलेगी। इसके आधार पर ही निरीक्षण करने होंगे।
0 Comments:
एक टिप्पणी भेजें