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मंगलवार, 25 अप्रैल 2023

शिक्षक भर्ती 1998 व 2004 में गड़बड़ी के चलते ही 3000 पात्र अभ्यर्थियों को नहीं मिली नियुक्ति ,



 शिक्षक भर्ती 1998 व 2004 में गड़बड़ी के चलते ही 3000 पात्र अभ्यर्थियों को नहीं मिली नियुक्ति ,


भर्ती परिक्षाओं में कर्मचारी-अधिकारियों की मिलीभगत, 1998 की भर्ती | में बोनस अंक देकर वरीयता सूची बनाई, सुप्रीम कोर्ट ने बताया था गलत पेपर आउट और नकल जैसे प्रकरणों के कारण रद्द होती भर्ती परीक्षाओं में राजस्थान लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन बोर्ड और पंचायतीराज विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों की लिप्तता सामने आई है ऐसा पहली बार नहीं है, जब बोर्ड और आयोग की लापरवाही के कारण बेरोजगार प्रभावित हो रहे हैं। इससे पहले भी शिक्षा विभाग की 1998 और 2004 की शिक्षक भर्ती में भी लापरवाही और मिलीभगत सामने आ चुकी है। जिसकी वजह से सालों बाद भी ३ हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल पाई है। भर्ती में गड़बड़ियां इस स्तर पर हुई कि अपात्र को नियुक्तियां दे दी गई। इनमें कई अभ्यर्थी तो अब रिटायरमेंट की उम्र के करीब पहुंच चुके हैं।  


1998 की शिक्षक भर्ती में तो कोर्ट के आदेशों की भी पालना के  नहीं की गई। इस भर्ती में फर्जीवाड़े के कारण 26 जिलों के 1400 के करीब शिक्षक प्रभावित हुए हैं। भर्ती से वंचित अभ्यर्थी उज्जवल जोशी ने बताया कि राज्य सरकार ने साल 1998 में थर्ड ग्रेड की भर्ती पंचायती राज विभाग के माध्यम से निकाली थी। इसमें राजस्थान के निवासियों को 10 अंक, गृह जिलों के अभ्यर्थियों को 10 अंक, ग्रामीण क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को 5 अंक बोनस के देकर वरियता सूची तैयार की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बोनस अंकों के आधार पर नियुक्ति देने को गलत बताया, लेकिन राज्य सरकार ने इसकी पालना नहीं की और हजारों अवैध नियुक्तियां दे दी गड़बड़ी ऐसी हुई की कम अंक वालों को नियुक्ति मिल गई और अधिक अंक वाले आज भी बेरोजगार हैं। इसमें बांसवाड़ा जिले के भी 100 से 150 शिक्षक शामिल हैं।


अधिकारियों ने भी माना भर्ती में हुई चूक... शिक्षक भर्ती 1998- कम वरीयता वालों को नियुक्ति, ज्यादा वाले बाहर हो गए

2019 में यह मामला विभागीय अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक में उठाया था। इसमें अधिकारियों ने माना की नियुक्ति में लापरवाही बरती गई है, हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं की गई है। इसके बाद ही कोर्ट ने इस भर्ती को गलत मानते हुए निरस्त करने के आदेश दिए थे। जिला परिषद की ओर से 1998 में की गई शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े को लेकर कई तरह की जांच हुई, लेकिन जिन्हें नौकरी से वंचित किया, उन्हें सरकार अब तक नौकरी नहीं दे पाई। इस दौरान करीब 5 सरकारें बदल गई। इन बोते सालों में नियुक्ति से वंचित रहे उच्च वरियता वाले अभ्यर्थियों के लिए 2003 और 2006 में नियुक्ति आदेश भी जारी हुए। लेकिन आदेशों की क्रियान्विति विभाग नहीं कर पाया। जानकारी के अनुसार 1998 से 2008 तक कई अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी गई, लेकिन सरकार ने कॉमन हल नहीं निकाला।


|2004: गलत तरीके से महिलाओं को हॉरीजेंटल आरक्षण का लाभ

इस भर्ती में आयोग ने चयन प्रक्रिया में आरक्षण से अधिक 2812 पदों पर अपात्रों का चयन कर लिया था। जिसमें 2354 महिलाएं और शेष भूतपूर्व सैनिक और दिव्यांग शामिल हैं। इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं होने पर विधानसभा में भी मुद्दे को उठाया जा चुका है। जिस पर सदन में जवाब दिया गया कि आयोग द्वारा कराई गई भर्ती परीक्षा का परिणाम संबंधित सेवा नियमानुसार एवं तत्समय जारी परिपत्र 31 मई, 2000 को ध्यान में रखते हुए जारी किया था। जिसके तहत महिलाओं को हॉरिजेंटल आरक्षण का लाभ दिया गया था। जबकि राजस्थान लोक सेवा आयोग ने एक सूचना के अधिकार के आवेदन में स्वीकार किया है कि चयन प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की अवहेलना कर आरक्षण से अधिक पदों पर चयन किया था।


शिक्षक भर्ती 1998 व 2004 में गड़बड़ी के चलते ही 3000 पात्र अभ्यर्थियों को नहीं मिली नियुक्ति , Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP BASIC NEWS

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