शिक्षा की रैकिंग में चूरू प्रदेश में टॉपर, हालात - 329 स्कूलों में 1337 कमरों की कमी, बरामदों में बैठकर पढ़ रहे स्टूडेंट्स
प्रदेश में शिक्षा एवं मुख्यमंत्री जनभागिता में डोनेशन में पिछले कई वर्षों से पहले नंबर चल रहे चूस जिले के 592 सीनियर सैकंडरी स्कूलों में से 329 में मापदंड के अनुसार स्टूडेंट्स के पढ़ने के लिए कमरे नहीं है। तकनीकी इंजीनियर का कहना है कि सीनियर स्कूल में स्टूडेंट्स के लिए कम से कम 12 कमरे 25 मई 20 फीट 7 फोट बरामदे के होने चाहिए। नोमस के अनुसार 329 स्कूलों में मापदंड के अनुसार कमरों की जरूरत है। इन स्कूलों में 1337 कमरों को और जरूरत है।
भास्कर ने कई स्कूलों में जाकर देखा तो बच्चे बरामदे में पढ़ रहे थे। तहसील के पोटी के राउमावि में कुछ बच्चे कमरे तो कुछ बरामदे में पढ़ रहे थे पड़ताल में सामने आला कि 592 सरकारी स्कूलों में कुल 15114 कमरे हैं, जबकि 1337 को की और है। मौजूदा 400 कमरों की मरम्मत करवाने की जरूरत है. कई कमी से पलस्तर गिरता रहता है। बारिश में पानी कपने की स्थिति भी रहती है।
भास्कर ने इस मामले में पाल की तो पता चला कि ये समस्या इसलिए सामने आई कि इस साल 180 सैकंडरी एवं 35 मिडिल स्कूल सीधे सीनियर सैकंडरी में क्रोत हो गए इन 215 स्कूलों में सीधे-सीधे कमरों की कमी हो गई। इसके अलावा 100 से ज्यादा ऐसे स्कूल है, जिनके भवन तीन दशक पुराने है। रतनगढ़ तहसील का भागुदा के निर स्कूल एवं तारानगर तहसील का भामरा स्कूल इसका उदाहरण है। यह मापदंड के अनुसार एक-एक कमरे हैं। इसका संबंधित संस्थाप्रधान यू-डाइस पर कर रखा है। भास्कर ने उनसे पूछताछ की तो कहा कि विभाग के उच्चाधिकारियों को और से ही ऐसा गया है पर स्कूल में वास्तविक कमरों की स्थिति नोर्मस के अनुसार देनी है। इन स्कूलों में कमरे तो है लेकिन बहुत छोटे है जिनमें 50 स्टूडेंट्स को एक साथ बैठाकर नहीं पढ़ाया जा सकता है।
स्कूल क्रमोन्नति से समस्या आई, संसाधन बढ़ाएंगे: जेडी
जिले में सरकारी स्कूलों में मापदंड के अनुमान कमरों की कमी हो सकती है। कैसे कम कम नहीं है। इस साल 215 स्कूलों के होने से ये स्थिति बनी है। डीईओ को निर्देश देवर स्कूलों के संस्थानों से कमरों की डिमांड मांगी। इसके बाद जनसहभागिता से कमरें बनाए जाएंगे ।


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