व्याख्याताओं की डीपीसी के बाद काउंसलिंग नहीं होने से गड़बड़ाई व्यवस्था, सरकारी स्कूलों में खाली पदों से प्रभावित हो रहा प्रवेशोत्सव!
सीकर. शिक्षा विभाग की लापरवाही से सरकारी स्कूलों में विचित्र हालात बनने के साथ नामांकन पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। शिक्षा विभाग ने करीब दस हजार व्याख्याओं को उप प्राचार्य व 500 व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नत करने के साथ ही 1941 उप प्राचार्य को प्राचार्य पद पर पदोन्नत करने के बाद मौजूदा स्कूल में ही पद स्थापित कर रखा है। ऐसे में एक तरफ करीब पांच हजार सरकारी स्कूलों में दो- दो प्राचार्य व 15 उपप्राचार्य तक हो गए हैं, वहीं प्रवेशोत्सव के बीच भी रिक्त पदों वाले स्कूलों को उनकी सेवा नहीं मिलने पर उनके नामांकन पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा विभाग में कितनी अंधेरगर्दी है।
साढ़े दस हजार से ज्यादा की डीपीसी
हाल में शिक्षा विभाग ने साढ़े दस हजार से ज्यादा व्याख्याताओं को प्राचार्य व उपप्राचार्य पद पर डीपीसी की है। इनमें 1941 उप प्राचार्य को प्राचार्य तथा 9,998 व्याख्याताओं को उप प्राचार्य पद पर पदोन्नत किया गया है। इनके अलावा 2021-22 में भी व्याख्याता से पदोन्नत हुए 500 प्राचार्य कोर्ट में विचाराधीन होने पर अभी पदस्थापन से वंचित है। पदोन्नति के बाद भी मौजूदा स्कूल में ही रहने पर स्कूलों की व्यवस्थाएं नहीं बैठ पा रही।
डीपीसी के साथ ही करना था पदस्थापन
सरकारी स्कूलों में एक से ज्यादा प्राचार्य व उप प्राचार्य के हालात शिक्षा विभाग की लापरवाही से ही हुए हैं। विभाग को डीपीसी के साथ ही खाली पदों वाले स्कूल में पद स्थापित करना चाहिए था। ताकि इस तरह की अव्यवस्था का आलम नहीं होता।
नामांकन पर असर
स्कूलों में परीक्षा परिणाम जारी होने के साथ ही प्रवेशोत्सव भी शुरू हो गया है, जिसका पहला चरण 16 मई तक है। प्राचार्य व उप प्राचार्य नहीं मिलने के कारण नामांकन प्रभावित होगा।
7,883 स्कूलों को दरकार है प्राचार्य की
एक तरफ जहां एक ही स्कूल में कई प्राचार्य व उप प्राचार्य का जमावड़ा है, दूसरी और प्रदेश के 17 हजार 883 स्कूल बिना प्राचार्य व उप प्राचार्य के चल रहे हैं। इनमें 7 हजार 383 स्कूलों को प्राचार्य तथा करीब 10 हजार 500 स्कूलों को उप प्राचार्य का इंतजार है।
पांच हजार स्कूलों में दो से ज्यादा प्राचार्य व उप उपप्राचार्य
पदोन्नति के बाद काउंसलिंग नहीं होने पर प्रदेश की करीब पांच हजार उच्च माध्यमिक स्कूलों में दो से ज्यादा प्राचार्य व उप प्राचार्य नियुक्त है। इनमें कऱीब 1500 स्कूलों में दो- दो प्राचार्य, जबकि करीब साढ़े तीन हज़ार स्कूलों में दो या इससे ज्यादा उप प्राचार्य शामिल है।
एक स्कूल में 15 उप प्राचार्य
शिक्षा विभाग की लापरवाही की बानगी है कि भीलवाड़ा की राउमावि प्रतापनगर में पदोन्नति के बाद अब 15 उप प्राचार्य नियुक्त है। इसी तरह सीकर की जौधराज मोहनलाल बजाज राउमावि लक्ष्मणगढ़ में भी एक साथ सात उप प्राचार्य नियुक्त है। अगस्त 2022 में उप प्राचार्य के पद स्वीकृत हो चुके थे। शिक्षा विभाग को उसी वक्त सभी की डीपसी कर एक साथ ही काउंसलिंग कर प्राचार्य व उप प्राचार्य का पदस्थापन करना चाहिए था।इससे स्कूलों में एक से ज्यादा प्राचार्य व उप प्राचार्य के अजीब हालात नहीं होते। नीचे के कैडर की डीपीसी भी समय पर होने पर शिक्षण व्यवस्था भी सही होती।-उपेंद्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत।

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