शिक्षा विभाग: डीपीसी हो तो 57 हजार शिक्षकों को मिले फायदा,तीन साल से अटकी हुई है डीपीसी
झुंझुनूं. राज्य सरकार एक तरफ हर जगह अपनी उपलब्धियां गिना रही है, वहीं शिक्षा विभाग में पिछले तीन वर्षों से लगभग 57 हजार पदों पर डीपीसी नहीं की जा रही। शिक्षकों की पदोन्नति लंबित चल रही है । नया सत्र शुरू होने वाला है, अगर देरी हुई तो सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के कारण पढाई बाधित होगी। कहीं स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं है तो कहीं व्याख्याता नहीं है। कहीं विषय अध्यापक नहीं है तो कहीं वरिष्ठ अध्यापकों के पद रिक्त चल रहे हैं। जबकि निजी स्कूलों में पहले से ही तैयारी पूरी कर ली गई है। रेसला जिला मंत्री कर्मवीर पूनिया ने बताया कि वर्ष 2021 -22 से लेकर 2023-24 तक की डीपीसी लंबित चल रही है ।तृतीय श्रेणी अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता ,व्याख्याता से वाइस प्रिंसिपल ,वाइस प्रिंसिपल से प्रिंसिपल और प्रिंसीपल से जिला शिक्षा अधिकारी के पदों की पदोन्नति रिक्त होने से शिक्षा की व्यवस्था चरमरा रही है ।
जिला कोषाध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा के अनुसार पिछले दिनों नवसृजित वाइस प्रिंसिपल के पदों पर की गई पदोन्नति भी न्यायालय में अटक गई है। रेसला महिला प्रदेश उपाध्यक्ष अंजू चौधरी ने बताया कि नया सत्र शुरू होने में लगभग 15 दिन शेष है लेकिन प्रदेश के शिक्षा विभाग के कार्यालय और विद्यालयों में विभिन्न विषयों के पद रिक्त होने से पूरे प्रदेश का विद्यार्थी असमंजस की स्थिति से गुजर रहा है । साथ ही महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में भी पद रिक्त चल रहे हैं ।
फैक्ट फाइल
-डीईओ पदों पर रिक्त डीपीसी: 280
-प्रिंसीपल पदों पर लंबित डीपीसी: 7000
-वाइस प्रिंसीपल पदों पर लंबित प्रक्रिया: 10000
-व्याख्याता पदों की रिक्त डीपीसी: 20000
-वरिष्ठ अध्यापक पद पर रिक्त डीपीसी :20000
विभाग में लबित सभी वर्गों की डीपीसी प्रक्रिया अतिशीघ्र सम्पन्न करवाई जानी चाहिए। ताकि नए सत्र के शुरू होने से पहले शिक्षा विभाग के सभी पद भरे जा सकें। मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को शिक्षकों की यह पीड़ा समझनी चाहिए।-प्रमेन्द्र कुल्हार, कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष, रेसला

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