ईडब्ल्यूूएस: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए केंद्र और राज्य के अलग अलग मापदंड, राज्य की पात्रता पर खरे, केंद्र की शर्तों में अटके
बीकानेर. आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के युवा प्रदेश में सरकारी नौकरी में दस प्रतिशत आरक्षण का लाभ लेने में तो सफल हो रहे हैं लेकिन केन्द्र सरकार की नौकरियों में नहीं। इसके पीछे दोनों सरकारों के ईडब्ल्यूएस श्रेणी के प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तय अलग-अलग मापदंड है। राज्य सरकार जहां सीधे तौर पर आठ लाख रुपए की तक की सालाना आय वाला को इस श्रेणी का पात्र मानती है। वहीं केन्द्र सरकार ने भूमि व सम्पत्ति की सीमाएं तय कर रखी हैं। जिन पर खरा उतरने वाला ही पात्रता के पैमाने पर खरा उतरता है। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति अलग है। यहां पर असिंचित भूमि के मालिक के पास आय का कोई साधन नहीं होता, जबकि वह केन्द्र के मापदंड के अनुसार आर्थिक रूप से सक्षम हो जाता है और पात्र नहीं रहता।
यही वजह है कि बीते वित्तीय वर्ष में प्रदेश में राज्य सरकार की नौकरियों के लिए ईडब्ल्यूएस के 2 लाख 77 हजार से ज्यादा प्रमाण पत्र बनाए गए। जिसे युवाओं ने सरकारी नौकरी और इस श्रेणी के आरक्षण का लाभ लेने के लिए काम में लिए। वहीं दूसरी तरफ केन्द्र सरकार की नौकरियों के लिए महज 95 हजार प्रमाण पत्र ही जारी हुए। केन्द्र सरकार के मापदंडों में विसंगतियों को दूर कर प्रदेश सरकार के तय मापदंड अपनाने की मांग लम्बे समय से राजस्थान के युवा कर रहे हैं।
राज्य सरकार बनाम केन्द्र सरकार
राजस्थान सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ लेने के लिए अचल सम्पत्ति संबंधी प्रावधान समाप्त किया हुआ है। अब केवल 8 लाख रुपए वार्षिक आय को ही आधार माना गया है। राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव कर सर्टिफिकेट की वैधता एक साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी है। यानि सर्टिफिकेट जारी होने की तिथि से तीन साल तक वैध रहेगा।
केन्द्र सरकार ने दस प्रतिशत आरक्षण के लिए शर्त लगा रखी है कि लाभार्थी के पास पांच एकड़ कृषि भूमि, 1000 वर्ग फीट का आवासीय फ्लैट और अनुसूचित व गैर अनुसूचित नगर पालिका क्षेत्र में 100 व 200 वर्ग गज से अधिक का भूखण्ड नहीं होना चाहिए। केन्द सरकार इस सर्टिफिकेट की वैधता जारी होने की तिथि से एक साल ही मानती है। इसके बाद लाभ लेने के लिए पुन: प्रमाण पत्र जारी करवाना पड़ता है।
प्रदेश की भौगोलिक स्थिति अलग
केन्द्र सरकार से ईडब्ल्यूएस की पात्रता में विसंगतियों को दूर कराने के लिए मुहिम चल रही है। श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन तो 2019 से इस मुद्दे को उठा रहा है। भाजपा के 550 पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने विसंगतियों को दूर करने के लिए मुहिम का समर्थन किया है। इसी तरह प्रदेश के एक हजार से अधिक सरपंचों के माध्यम से मांग के समर्थन में सहमति पत्र केन्द्र सरकार को भेजे गए हैं। असल में केन्द्र की नौकरियों में आरक्षण के लिए भूमि व सम्पत्ति संबंधी प्रावधान दिल्ली जैसे महानगर को देखकर बनाए गए हैं। जहां बहुत छोटा भूखण्ड या भूमि का टुकड़ा लाखों रुपए की कीमत का है। जबकि राजस्थान प्रदेश में बड़े क्षेत्र की असिंचित भूमि और बड़े भूभाग के मालिक होने के बावजूद उससे काई आय नहीं होती है। ऐसे में सरकार ने जिस तरह आठ लाख रुपए वार्षिक आय की सीमा तय की है। उसी तरह केन्द्र को भी करना चाहिए।
जिला राज्य केन्द्र
जयपुर 32469 15474
बीकानेर 10335 2946
अजमेर 7569 1158
बांसवाड़ा 1448 161
बारां 3351 757
बाड़मेर 7703 1304
भरतपुर 12984 7554
भीलवाड़ा 10010 1114
बूंदी 5009 746
चित्तोड़गढ़ 6268 619
चूरू 13521 2035
दौसा 13427 5387
धौलपुर 9618 4921
डूंगरपुर 2446 328
हनुमानगढ़ 6934 1483
जैसलमेर 5522 438
जालौर 4744 1170
झालावाड़ 3836 1152
झुंझुनूं 6574 4904
जोधपुर 14081 3297
करौली 9259 3916
कोटा 6647 1326
नागौर 14342 4062
पाली 6693 832
प्रतापगढ़ 854 107
राजसमंद 3669 185
सवाईमाधोपुर 8142 2728
सीकर 13520 8165
सिरोही 3063 476
श्रीगंगानगर 5970 2204
टोंक 8386 1498
उदयपुर 6482 703
कुल 277555 95243

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