परिवादी ने कहा... आयोग सदस्य मंजू के नाम पर ही मांगी थी घूस
जयपुर. सीकर. अधिशासी अधिकारी (ईओ) परीक्षा की ओएमआर शीट बदलवा कर पास कराने के नाम पर 18.50 लाख रुपए घूस लेने के मामले में एसीबी ने कुमार विश्वास की पत्नी आरपीएससी सदस्य मंजू शर्मा को एफआइआर में नामजद किया। जबकि अन्य सदस्यों की भूमिका संदिग्ध बताई है। परिवादी ने कहा है कि गोपाल ने मंजू के नाम पर रिश्वत मांगी थी। अनिल ने परिवादी को आरपीएससी चेयरमैन व अन्य सदस्य से जानकारी का हवाला देते हुए केसावत से मिलवाया था। पीड़ित के परिवाद पर ही एफआईआर दर्ज की गई है। उधर, ट्रेप के एक दिन बाद रविवार को एसीबी के कार्यवाहक डीजी हेमंत प्रियदर्शी ने प्रेसवार्ता कर आरपीएससी सदस्यों व अधिकारियों को मौखिक क्लीन चिट दी है। उन्होंने कहा कि अन्तिम निर्णय गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डाटा विश्लेषण के बाद दिया जाएगा।
एसीबी ने राज्य घुमंतू जाति कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष गोपाल केसावत व तीन अन्य को 18.50 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार गोपाल केसावत जयपुर के प्रताप नगर में कुम्भा मार्ग, ब्रह्मप्रकाश दिल्ली, अनिल कुमार धरेन्द्र हनुमानगढ़ टाउन तथा रवीन्द्र शर्मा टिब्बी निवासी हैं। परिवादी ने अपनी शिकायत में आयोग के चेयरमैन व अन्य महिला सदस्य पर भी आरोप लगाए हैं। एसीबी ने गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेने की बजाय कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।
दलाल बोला: पहले 25, भर्ती के बाद 15 लाख रुपए देना
मुख्य परिवादी एडवोकेट हरदीपसिंह सुंदरिया व दूसरे परिवादी सुंदर ने एसीबी सीकर को 7 जुलाई को लिखित में परिवाद पेश किया, जिसमें बताया कि भर्ती मेरिट में लाने के लिए आरोपी अनिल कुमार ने आरपीएससी सदस्य मंजू शर्मा व आरपीएससी चेयरमैन के नाम से यह कहकर रुपए मांगे कि ये दोनों 40 लाख रुपए लेंगे। 25 लाख रुपए पहले व शेष 15 लाख रुपए भर्ती के बाद लेंगे। इसके बदले में अभ्यर्थी विकास को मेरिट में लाकर ईओ के पद पर नौकरी लगवा देंगे। उक्त मामले की एसीबी ने एफआईआर दर्ज की। आरोपी ने ओएमआर सीट देखकर बताया था कि उसके 62 सवाल सही और 20 सवाल गलत हैं। इस पर विकास व उसके परिजन को विश्वास हो गया। 40 लाख में सौदा भी तय कर लिया। 25 लाख पहले व 15 लाख भर्ती होने के बाद देने की बात कही। इस पर विकास सहित दोनों परिवादी ने एसीबी में शिकायत दी।
एसीबी डीजी प्रियदर्शी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आजकल बड़े-बड़े लोग सीधेे पैसे नहीं लेते हैं। दलालों के जरिए पैसे लेते हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में वर्ष 2018 में संशोधन किया गया है। इसके तहत धारा 7 ए में प्रावधान है कि किसी सरकारी कर्मचारी व अधिकारी के नाम लिए गए रुपए भ्रष्टाचार माना जाएगा। यह कार्रवाई इसी के तहत की गई है।
कवि कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा एफआईआर में नामजद
रविवार को एसीबी के एडीजी ने प्रेस वार्ता में आरपीएससी सदस्यों व अधिकारियों को दी मौखिक क्लीनचिटअन्तिम निर्णय केसावत सहित चारों आरोपियों के मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रोनिक उपकरणों की जांच के बाद बड़े लोग नहीं लेते सीधे-सीधे पैसे
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