राजस्थान की गहलोत सरकार का बड़ा निर्णय; अब स्कूलों में पढ़ाया जाएगा संविधान, कोर्स में जुडेंगे ये चैप्टर
राजस्थान की गहलोत सरकार ने सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के पाठ्यक्रम को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब संस्थानों के पाठ्यक्रम में संविधान के प्रमुख पहलुओं को शामिल जाएगा। राजस्थान ऐसा करने वाला देश का तीसरा राज्य है। इससे पहले छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सरकारों ने यह निर्णय लिया था। अब राजस्थान में भी यह लागू होने जा रहा है। इस दौरान बच्चों को स्कूल में संविदान की प्रस्तावना और मौलिक कर्तव्यों को पढ़ेंगे।
जुड़ेंगे ये नए चैप्टर
राजस्थान की गहलोत सरकार ने सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में संविधान की कुछ प्रमुख बातों को जोड़ने का निर्णय लिया है। इस मामले के जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस तरह सरकार ने किसी भी सरकारी कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रगान गाना अनिवार्य कर दिया है, उसी तरह अब हर स्कूल में प्रस्तावना और मौलिक कर्तव्यों को पढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके पीछे उद्देश्य यह है कि हमारी युवा पीढ़ी को हमारे महान संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद पर ज्यादा भरोसा और गर्व हो।
साल 2020 के जनवरी महीने में मध्य प्रदेश सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम की संवैधानिकता पर सवाल उठाने वाले विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि पढ़ने को अनिवार्य बनाने का एक आदेश जारी किया था। मध्य प्रदेश सरकार के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने निर्णय लिया कि महीने के पहले सप्ताह में स्कूलों में प्रस्तावना पर चर्चा की जाएगी, उसके बाद दूसरे सप्ताह में संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकारों पर चर्चा और तीसरे सप्ताह में मौलिक कर्तव्यों पर चर्चा की जाएगी।
राज्य के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य है जहां शांति एवं अहिंसा विभाग है। अक्टूबर 2022 को राज्यपाल ने राज्य में शांति एवं अहिंसा विभाग के गठन के कैबिनेट के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। 2023 में मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में शांति एवं अहिंसा प्रकोष्ठों का उद्घाटन किया। उन्होंने आगे कहा कि राज्य जयपुर में गांधी संग्रहालय भी बना रहा है, जो अपनी तरह का एक विशेष संग्रहालय है, जिसमें लोगों को महात्मा गांधी के जीवन और उनके कार्यों के बारे में जानने का मौका मिलेगा।
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