NTA ने बदला पेपर बनाने का तरीका, अब 4 चरणों में चुने जाएंगे Subject Experts; क्या बदलेगा?
NTA Exam System 2026: राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव शुरू किया है। एजेंसी ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों के चयन और उनकी जांच की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा सख्त करने का फैसला किया है। करीब 600 विषय विशेषज्ञों को पैनल से हटाया गया है और उनकी जगह नए विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रश्नपत्रों की जांच के लिए चार स्तरीय व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। यह बदलाव ऐसे समय किया जा रहा है जब NEET-UG और UGC-NET जैसी बड़ी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र से जुड़े विवाद सामने आ चुके हैं। खासकर UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, भाषा और अनुवाद से जुड़ी गलतियां सामने आने के बाद तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया। अब इन विषयों की परीक्षा 9 और 10 सितंबर 2026 को होगी। ऐसे में NTA का नया सिस्टम यह तय करने की कोशिश है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र की छोटी से छोटी गलती पकड़ ली जाए।
600 विशेषज्ञों को हटाकर नई टीम क्यों बनाई गई?
NTA की प्रश्नपत्र तैयार करने वाली व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव विशेषज्ञों के पैनल को लेकर हुआ है। करीब 600 विशेषज्ञों को हटाकर नई टीम तैयार की जा रही है। एजेंसी आने वाले समय में नए विषय विशेषज्ञों को जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाएगी। इसके अलावा अगले दो से तीन सप्ताह में करीब 20 से 25 नए अधिकारियों को NTA में शामिल किए जाने की योजना बताई गई है।प्रश्नपत्र तैयार करने में विषय विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा में हजारों नहीं, बल्कि लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र में एक तथ्यात्मक गलती, गलत विकल्प या अनुवाद की छोटी समस्या भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है। UGC-NET में सामने आई गड़बड़ियों ने इसी कमजोरी को उजागर किया है।नई टीम के चयन में विशेषज्ञों की शैक्षणिक और पेशेवर जानकारी के साथ उनकी पहचान, गोपनीयता और हितों के टकराव से जुड़े पहलुओं की भी जांच पर जोर दिया जा रहा है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को दी जाए जिनकी पृष्ठभूमि और भूमिका को पर्याप्त रूप से सत्यापित किया जा सके।
चार चरणों में होगी प्रश्नपत्र की जांच
NTA के नए सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा प्रश्नपत्र की चार स्तरीय जांच व्यवस्था है। इसका उद्देश्य यह है कि प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसे केवल एक व्यक्ति या एक टीम की समीक्षा पर निर्भर न रहना पड़े। अलग-अलग स्तरों पर प्रश्नों की गुणवत्ता और शुद्धता जांची जाएगी।इस जांच में प्रश्नों की तथ्यात्मक शुद्धता, भाषा, अनुवाद और प्रारूप जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि अगर प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञ से कोई गलती रह जाती है तो अगले स्तर पर उसे पकड़ा जा सके। इसी तरह अनुवाद के दौरान अर्थ बदलने या भाषा में गलती होने की स्थिति में भी उसे परीक्षा से पहले सुधारा जा सकेगा।इस व्यवस्था की जरूरत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि NTA की परीक्षाओं में देशभर से उम्मीदवार शामिल होते हैं। एक प्रश्नपत्र की गलती का असर एक जिले या एक कॉलेज तक सीमित नहीं रहता। लाखों उम्मीदवारों के अंक और रैंक प्रभावित हो सकते हैं। कई मामलों में गलत प्रश्नों के कारण आपत्तियां, संशोधित उत्तर कुंजी और यहां तक कि दोबारा परीक्षा की स्थिति बन सकती है।
UGC-NET की गलती के बाद बढ़ा दबाव
NTA के इस बदलाव का सबसे ताजा संदर्भ UGC-NET जून 2026 है। जून में हुई परीक्षा के बाद अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों को लेकर शिकायतें सामने आईं। विशेषज्ञ समिति की समीक्षा में कई तरह की त्रुटियां सामने आने के बाद इन तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया।इस मामले में केवल एक-दो सवालों की गलती की बात नहीं थी। रिपोर्टों में तथ्यात्मक गलतियों, टाइपिंग, भाषा और अनुवाद संबंधी समस्याओं का उल्लेख किया गया। यही वजह रही कि तीनों विषयों के उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा कराना जरूरी समझा गया। अब री-एग्जाम के कारण प्रभावित उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी होगी, जबकि बाकी 84 विषयों की प्रक्रिया अलग जारी रहेगी।यानी NTA के सामने चुनौती सिर्फ प्रश्नपत्र लीक रोकने की नहीं है। प्रश्नपत्र सही, स्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से विश्वसनीय हो, यह भी उतना ही जरूरी है।
अब उम्मीदवारों को क्या फर्क पड़ेगा?
नए सिस्टम का सबसे बड़ा असर सीधे उम्मीदवारों पर नहीं, बल्कि परीक्षा के पीछे काम करने वाली पूरी व्यवस्था पर पड़ेगा। उम्मीदवारों को आवेदन या परीक्षा केंद्र से जुड़ी प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देगा। लेकिन परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र तैयार होने और उसकी समीक्षा की प्रक्रिया ज्यादा लंबी और सख्त हो सकती है।इसका एक संभावित असर यह भी हो सकता है कि प्रश्नपत्र तैयार करने में पहले से ज्यादा समय लगे। लेकिन अगर इससे गलत प्रश्न, गलत उत्तर या अनुवाद की समस्या परीक्षा शुरू होने से पहले पकड़ ली जाती है तो उम्मीदवारों के लिए यह बदलाव फायदेमंद होगा।किसी प्रतियोगी परीक्षा में उम्मीदवार कई महीनों या वर्षों तक तैयारी करते हैं। परीक्षा के दिन अगर किसी प्रश्न में गलती मिलती है तो उसका असर सिर्फ एक अंक पर नहीं पड़ता। कई बार रैंक बदल सकती है और उम्मीदवार का आगे का अवसर भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए प्रश्नपत्र की गुणवत्ता की जांच परीक्षा व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा है।
NTA में सिर्फ प्रश्नपत्र ही नहीं, सुरक्षा व्यवस्था भी बदलेगी
एजेंसी की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव केवल विशेषज्ञों और प्रश्नपत्र की जांच तक सीमित नहीं है। NTA के कार्यालय को ओखला से मिंटो रोड स्थित सरकारी परिसर में स्थानांतरित करने की तैयारी है और नए परिसर की सुरक्षा में CISF की भूमिका होगी। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा, मनोमिति और परीक्षा संचालन जैसे क्षेत्रों में पेशेवर विशेषज्ञता बढ़ाने की योजना भी सामने आई है।प्रश्नपत्र की गोपनीयता को मजबूत करने के लिए सुरक्षित कमरे और इंटरनेट से अलग रखे गए कंप्यूटर सिस्टम जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा शुरू होने तक उसकी गोपनीयता बनी रहे।
आगे की परीक्षाओं में दिखेगा असर
NTA के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन बदलावों को कागज पर लागू करने के बजाय वास्तविक परीक्षा प्रक्रिया में प्रभावी तरीके से लागू करने की है। NEET-UG, JEE Main, UGC-NET और CUET जैसी परीक्षाओं में हर साल बड़ी संख्या में उम्मीदवार शामिल होते हैं। इसलिए किसी भी नई व्यवस्था की असली परीक्षा तभी होगी जब वह बड़े स्तर की परीक्षा में बिना देरी और बिना नई समस्या के काम करे।फिलहाल चार स्तरीय प्रश्नपत्र जांच, नए विशेषज्ञों की टीम और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था NTA की परीक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव है। इसका उद्देश्य साफ है प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले कई स्तरों पर जांचा जाए और उम्मीदवारों को ऐसी गलती का सामना न करना पड़े जिसके कारण पूरी परीक्षा पर सवाल उठे। आने वाली राष्ट्रीय परीक्षाओं में यह व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है, अब इसी पर छात्रों और शिक्षा जगत की नजर रहेगी।
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