UP Board 12th Exam 2027: अब 80 नंबर का होगा लिखित पेपर, 20 अंक इंटरनल के; हर यूनिट से आएंगे सवाल
UP Board 12th Exam 2027: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट परीक्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 और राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र यानी परख की सिफारिशों के आधार पर कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए नया प्रश्नपत्र तैयार किया गया है। इसके तहत गैर-प्रायोगिक विषयों में अब 100 अंकों की पूरी लिखित परीक्षा के बजाय 80 अंकों का लिखित पेपर और 20 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन रखने की तैयारी है। यह बदलाव अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा 11 में लागू किया जाएगा, जिसके बाद आगे चलकर यही व्यवस्था इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में दिखाई देगी।अभी यूपी बोर्ड में विषयों के अनुसार परीक्षा और मूल्यांकन की व्यवस्था अलग-अलग है। भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गृह विज्ञान जैसे प्रायोगिक विषयों में 70 अंक की लिखित परीक्षा और 30 अंक की प्रायोगिक परीक्षा होती है। वहीं हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और अर्थशास्त्र जैसे गैर-प्रायोगिक विषयों में 100 अंक की लिखित परीक्षा होती है। नए बदलाव के बाद गैर-प्रायोगिक विषयों में 80 अंक की लिखित परीक्षा के साथ 20 अंक का आंतरिक मूल्यांकन जोड़ा जाएगा। प्रायोगिक विषयों में भी लिखित और प्रायोगिक अंकों के बंटवारे को बदलकर 80 और 20 करने की तैयारी है।
रटने के बजाय समझ पर होगा जोर
नए परीक्षा पैटर्न की सबसे खास बात यह है कि छात्रों को सिर्फ किताब में दिए गए तथ्यों को याद करके लिखने के बजाय विषय को समझकर उसका इस्तेमाल करना होगा। नए प्रतिदर्श प्रश्नपत्रों में सबसे ज्यादा 35 प्रतिशत अंकों के प्रश्न अनुप्रयोग आधारित रखने की व्यवस्था की गई है। इसका मतलब है कि परीक्षा में ऐसे सवाल बढ़ेंगे जिनमें छात्र से यह पूछा जा सकता है कि उसने पढ़ी हुई जानकारी को किसी परिस्थिति या दैनिक जीवन में किस तरह लागू किया।राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने कक्षा 11वीं और 12वीं के इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और नागरिक शास्त्र जैसे विषयों के प्रतिदर्श प्रश्नपत्र तैयार किए हैं। इन प्रश्नपत्रों को राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र यानी परख की सिफारिशों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों की केवल याददाश्त नहीं, बल्कि उनकी समझ, विश्लेषण क्षमता, मूल्यांकन और रचनात्मक सोच को भी परखना है।
छह स्तरों पर होगा विद्यार्थियों का मूल्यांकन
यूपी बोर्ड के पुराने प्रश्नपत्रों में मुख्य रूप से ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग और कौशल के आधार पर विद्यार्थियों की समझ परखी जाती थी। इनमें ज्ञान का हिस्सा 20 प्रतिशत, बोध 30 प्रतिशत, अनुप्रयोग 30 प्रतिशत और कौशल 20 प्रतिशत था।नए प्रश्नपत्र में मूल्यांकन के छह अलग-अलग स्तर रखे गए हैं। इसमें ज्ञान और बोध को 17.5-17.5 प्रतिशत, अनुप्रयोग को 35 प्रतिशत, विश्लेषण को 22 प्रतिशत, मूल्यांकन को 4 प्रतिशत और सृजन को 4 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है। इस बदलाव से साफ है कि अनुप्रयोग और विश्लेषण आधारित सवालों का महत्व पहले की तुलना में बढ़ जाएगा।इसका सीधा असर छात्रों की तैयारी पर पड़ेगा। अब सिर्फ महत्वपूर्ण प्रश्नों को याद कर लेना पर्याप्त नहीं होगा। विद्यार्थियों को पूरे विषय की अवधारणाओं को समझना होगा और यह भी देखना होगा कि किसी सिद्धांत या जानकारी का इस्तेमाल वास्तविक परिस्थिति में कैसे किया जा सकता है।
हर यूनिट से सवाल करना होगा अनिवार्य
नए प्रश्नपत्र की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पाठ्यक्रम की प्रत्येक यूनिट से प्रश्न पूछना अनिवार्य किया गया है। हर यूनिट का प्रश्नपत्र में निश्चित अधिभार रहेगा। इसका मतलब है कि छात्र किसी एक यूनिट को छोड़कर केवल चुनिंदा अध्यायों की तैयारी करके परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद नहीं कर सकेंगे।नए मॉडल प्रश्नपत्रों में बाहरी विकल्प नहीं रखने की व्यवस्था की गई है। इससे पूरे पाठ्यक्रम की तैयारी करना जरूरी हो जाएगा। वर्णनात्मक प्रश्नों की संख्या में भी कमी की गई है। विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए जाएंगे, लेकिन ये विकल्प उसी यूनिट, उसी उद्देश्य और समान कठिनाई स्तर के होंगे।इस बदलाव का उद्देश्य प्रश्नपत्र को संतुलित रखना है, ताकि किसी एक अध्याय या यूनिट से जरूरत से ज्यादा प्रश्न न आ जाएं और पूरे पाठ्यक्रम का उचित प्रतिनिधित्व हो।
दैनिक जीवन से जुड़े सवालों पर रहेगा जोर
नए मॉडल प्रश्नपत्रों में ऐसे सवाल शामिल किए जा रहे हैं जिनका जवाब केवल रटकर नहीं दिया जा सकेगा। विद्यार्थियों को प्रश्न को समझना होगा, उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करना होगा और उसके आधार पर उत्तर तैयार करना होगा।उदाहरण के तौर पर किसी विषय की परिभाषा सीधे पूछने के बजाय उससे जुड़ी परिस्थिति देकर छात्र से यह पूछा जा सकता है कि उस स्थिति में संबंधित सिद्धांत किस तरह काम करेगा। इससे विद्यार्थियों की चिंतन क्षमता, आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को परखा जा सकेगा।राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप के अनुसार प्रश्नपत्र को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्र उत्तर रटकर देने के बजाय समझ और दैनिक जीवन में उसके अनुप्रयोग के आधार पर दें। प्रश्नपत्र तैयार करते समय प्रश्न के उद्देश्य, प्रकार, कठिनाई स्तर और संबंधित प्रकरणों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
इंटरनल के 20 अंक भी होंगे महत्वपूर्ण
गैर-प्रायोगिक विषयों में 20 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन जुड़ने के बाद छात्रों के पूरे साल के प्रदर्शन की अहमियत बढ़ जाएगी। अभी ऐसे विषयों में बोर्ड परीक्षा का पूरा मूल्यांकन 100 अंकों की लिखित परीक्षा के आधार पर होता है। नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा का हिस्सा घटकर 80 अंक होगा और बाकी 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन से जुड़े होंगे।इससे छात्रों के लिए केवल बोर्ड परीक्षा की तैयारी करना ही पर्याप्त नहीं रहेगा। स्कूल स्तर पर होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों और आंतरिक मूल्यांकन में भी बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी होगा। हालांकि आंतरिक मूल्यांकन के 20 अंक किस-किस गतिविधि और किस प्रक्रिया के आधार पर दिए जाएंगे, इसकी विस्तृत व्यवस्था बोर्ड की ओर से जारी किए जाने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगी।
छात्रों की तैयारी का तरीका बदलेगा
नए पैटर्न के लागू होने के बाद यूपी बोर्ड के छात्रों को अपनी पढ़ाई की रणनीति में बदलाव करना होगा। सबसे पहले पूरे पाठ्यक्रम को यूनिट के हिसाब से पढ़ना जरूरी होगा, क्योंकि हर यूनिट से प्रश्न आने की व्यवस्था की गई है। इसके बाद विषय की अवधारणाओं को समझने पर ध्यान देना होगा।35 प्रतिशत अनुप्रयोग आधारित प्रश्न और 22 प्रतिशत विश्लेषण आधारित मूल्यांकन का हिस्सा यह संकेत देता है कि परीक्षा में सिर्फ याद की हुई जानकारी लिखना पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों को उदाहरणों, परिस्थितियों और दैनिक जीवन से जोड़कर विषय को समझना होगा। मॉडल प्रश्नपत्रों से अभ्यास करना भी पहले की तुलना में ज्यादा उपयोगी रहेगा। UP Board 12th Exam 2027 का यह प्रस्तावित बदलाव परीक्षा को केवल याददाश्त पर आधारित रखने के बजाय छात्रों की समझ, विश्लेषण, समस्या समाधान और रचनात्मक सोच को परखने की दिशा में बड़ा कदम है। 80 अंकों की लिखित परीक्षा, 20 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन, प्रत्येक यूनिट से प्रश्न और 35 प्रतिशत अनुप्रयोग आधारित सवाल ये चार बदलाव छात्रों की तैयारी का तरीका बदल सकते हैं। हालांकि अंतिम रूप से लागू होने वाली व्यवस्था के लिए छात्रों को यूपी बोर्ड और संबंधित शिक्षा संस्थानों की आधिकारिक सूचना को ही मानना चाहिए।
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