Education Budget 2023: अधिक शिक्षा बजट, मजबूत डिजिटल लर्निंग इंफ्रा और टैक्स छूट हैं EdTechs की FM से उम्मीदें
Education Budget 2023 Expectations: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण एक बार फिर केंद्र सरकार का वित्तीय वर्ष 2023-23 के लिए बजट 1 फरवरी को प्रस्तुत करने जा रही हैं। लगातार दो वर्षों तक कोरोना महामारी और रोकथॉम के लिए लगे प्रतिबंधों के चलते बाधित रही शैक्षणिक गतिविधियों के बीच डिजिटल लर्निंग को मिले बढ़ावों, इसी दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लागू करने की दिशा में केंद्र व राज्य स्तर पर किए जा रहे प्रयासों और टेक्नोलॉजी स्पेस में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बढ़ती पहुंच के साथ नई शिक्षा व्यवस्था में लर्निंग के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, टैक्स में छूट, आदि जैसी कई उम्मीदें एजुकेशन सेक्टर में लगे प्लेयर्स वित्त मंत्री से लगा रहे हैं।
बता दें कि वर्ष 2022-23 के लिए वित्त मंत्री ने पूर्व के वर्षों से कहीं अधिक 104278 करोड़ रुपये के व्यय का प्रस्ताव किया था। अब वर्ष 2022-24 के बजट से भी एजुकेशन सेक्टर के प्लेयर्स को और अधिक आवंटन की उम्मीद है। सेठ आनंदराम जयपुरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस और FICCI एराइज के अध्यक्ष शिशिर जयपुरिया कहते हैं, “भारतीय शिक्षा को युवा सशक्तिकरण, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण के उत्प्रेरक के रूप में विकसित करने के लिए नीति और बजटीय जोर की आवश्यकता है। आगामी केंद्रीय बजट में सीखने की गुणवत्ता बढ़ाने, शिक्षक पेशेवर कौशल में सुधार, मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण करने और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्कूल और उच्च शिक्षा के मुख्य पहलुओं को संबोधित किया जाना चाहिए। यह अनुशंसा की जाती है कि सरकार को शिक्षा के लिए सकल घरेलू उत्पाद का 6% आवंटित किया जाए।
इसी प्रकार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिजिटल लर्निंग और एसेसमेंट में कार्य कर रही एडुटेक कंपनी Zamit के फाउंडर आरुल मालवीय कहते हैं, “महामारी के बाद से स्कूली और यूनिवर्सिटी लेवल पर हाइब्रिड एजुकेशन सिस्टम को बढ़ावा मिला है। इसके चलते नए जमाने के एडुटेक स्टार्ट-अप्स शैक्षणिक संस्थानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रैक्टिसेस के लिए प्रेरित कर रहे हैं और छात्रों और अध्यापकों को भविष्य के लिए जरूरी स्किल से उन्हें ज्यादा योग्य तथा सक्षम बना रहे हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि डिजिटल लर्निंग के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय और नीतिगत सहायता तथा प्रोत्साहन दिया जाए। मसलन किसी प्राइवेट कम्पनी को टैक्स में छूट और सब्सिडी मिलती है तो यह सरकार की तरफ डिजिटल लर्निंग में बहुत बड़ी मदद होगी।
दूसरी तरफ, नई दिल्ली वसंत विहार स्थित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में शिक्षा से जुड़े एक संस्थान FIIB की कार्यकारी निदेशक राधिका श्रीवास्तव कहती हैं, ''केंद्रीय बजट 2023 से शिक्षा क्षेत्र को कई घोषणाओं की उम्मीद है। इसमें एक बार फिर अधिक बजट का आवंटन, विशेष कर प्रोत्साहन, और डिजिटल सीखने के लिए अनुकूल वातावरण को सक्षम करना, आदि शामिल है। शिक्षकों के कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं की घोषणा, एनईपी 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन और इसके उद्देश्यों को प्राप्त करने से भी देश भर में गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
उद्योग-संस्थान में कौशल की खांई को कम करने की दिशा में प्रयास किए जाने के लिए केंद्रीय शिक्षा बजट 2023 में प्रावधान किए जाने की मांग ग्रेट ल्रर्निंग के फाउंडर और सीईओ मोहन लखमराजु करते हैं। “बड़ी संख्या में युवाओं को उद्योग के लिये प्रासंगिक कौशल से लैस करना भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे ले जाने का एक निश्चित तरीका है। मेरा मानना है कि भारत के युवाओं के लिए किफायती उच्च शिक्षा तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अवसरों का विस्तार करना समय की मांग है ताकि उन्हें अत्याधुनिक कौशल विकसित करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें। इस संदर्भ में, भारत सरकार आगामी वित्तीय बजट में कुछ पहलें कर सकती है- पहला, एडटेक कंपनियों को ऑनलाइन और हाइब्रिड डिग्री प्रोग्राम्स की पेशकश के लिये यूनिवर्सिटीज के साथ औपचारिक साझेदारी करने की अनुमति प्रदान करना, ताकि सरकार द्वारा निर्धारित ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके और दूसरा, अपस्किलिंग प्रोग्राम्स से जीएसटी हटाना, ताकि वे लोगों के लिये ज्यादा किफायती बन सकें। वर्कफोर्स की नौकरी करने की योग्यता को बढ़ाने के अलावा, यह उपाय हमारे देश में ज्यादा से ज्यादा नवाचार करने को बढ़ावा देंगे और तकनीकी प्रगति को संभव बनाएंगे।”

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