शिक्षा विभाग डाल-डाल तो शिक्षक पांत-पांत, फोटो भेजने के नियमों का ऐसे उड़ाया माखौल
बेसिक शिक्षा विभाग के तो खेल ही अलग हैं। अब कई जिलों सहित आगरा के शिक्षकों की पोल एक पोर्टल ने खोल दी। शिक्षकों से बैठकों की फोटो मांगी थी। लेकिन अपलोड कर दी कुछ और फोटो। इन फोटो में कहीं शिक्षक मोबाइल चलाते दिखाई दे रहे हैं। तो कहीं बात करते तो कहीं कुछ और काम करते। कहीं कहीं तो सेल्फी ही भेज दी गई। यह किसी एक जिले का मामला नहीं है। पूरे प्रदेश में सभी जिलों में “वांछित” की जगह “अवांछित” फोटो की भरमार है। महानिदेशक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी जारी की है।
आगरा में शिक्षक संकुलों की बैठक के 86 प्रतिशत फोटो अवांछित माने गए हैं। सबसे ज्यादा अवांछित फोटो प्रयागराज के हैं। यहां 98 फीसदी फोटो बैठक के नहीं हैं। सबसे कम गलत फोटो अमरोहा के हैं यहां मात्र 22 फीसदी फोटो गलत पाए गए हैं। महानिदेशक की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि डीसीएफ (डाटा कैप्चर फॉर्मेट) प्रपत्र में अपलोड फोटो में शिक्षक संकुलों की मीटिंग में विचार-विमर्श कम टाइमपास करते ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने के लिए महानिदेशक वीके आनंद ने संकुलों की मीटिंग में विभिन्न समस्याओं के समाधान पर चर्चा टीचिंग लर्निंग मटेरियल सहित कई मुद्दों पर चर्चा के निर्देश दिए थे।
आसपास के 5-6 स्कूलों का समूह है संकुलन
इस समूह के एक अच्छे स्कूल के शिक्षक को शिक्षक संकुल का नाम देकर विभागीय सूचनाओं के समन्वय का कार्य दिया जाता है। ताकि वह सभी के लिए मॉडल शिक्षक बन सके। इस शिक्षक संकुल के नेतृत्व में ही प्रत्येक माह संकुल बैठक आयोजित की जाती है। बैठक में विद्यालय की अपेक्षाओं व निर्देशों आदि पर विचार विमर्श किया जाता है। बैठक में एआरपी, एसआरजी तथा खंड शिक्षा अधिकारी भी प्रतिभाग करते हैं।
एडी बेसिक महेश चंद्र का कहना है कि स्कूली शिक्षा के नाराजगी जताने का प्रकरण संज्ञान में है। इसे लेकर उन्होंने पत्र भी लिखा है। निर्देशों के अनुसार ही शिक्षकों को संकुल की बैठक कर फोटो डीसीएफ प्रपत्र में अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों से पूछताछ की जाएगी।
इन जिलों ने ये रहा गलत फोटो का प्रतिशत
जिला प्रतिशत
आगरा 86
अलीगढ़ 75
बरेली 88
गोरखपुर 78
कानपुर 35
लखनऊ 75
मेरठ 58
मुरादाबाद 62
प्रयागराज 98
वाराणसी 63
गाजियाबाद 53
गौतमबुद्धनगर 71
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