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शुक्रवार, 17 मार्च 2023

शिक्षकों की कमी पड़ रही है उच्च शिक्षा पर भारी, नए कॉलेज खोलने की घोषणाएं तो खूब होती हैं, लेकिन इनमें शिक्षा की गुणवत्ता की बात कोई नहीं करता



 शिक्षकों की कमी पड़ रही है उच्च शिक्षा पर भारी, नए कॉलेज खोलने की घोषणाएं तो खूब होती हैं, लेकिन इनमें शिक्षा की गुणवत्ता की बात कोई नहीं करता

प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के कोरे दावे ही हो रहे हैं। कॉलेजों में चलाई जा रही विद्या सम्बल योजना को देखकर तो ऐसा लगता है कि इस योजना को ही सम्बल की जरूरत है। उच्च शिक्षा मंत्री विधानसभा में जवाब देते हैं कि रिक्त पदों पर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति होने तक विद्या सम्बल योजना के तहत अस्थायी शिक्षक लगाए जा रहे हैं। इस जवाब के विपरीत हालत यह है कि कुछ दिन पहले आयुक्तालय के मौखिक आदेश पर राजकीय कॉलेजों में इस योजना के तहत अध्ययन करवा रहे दो हजार शिक्षकों को हटा दिया गया। तर्क यह दिया गया कि जिनका कोर्स पूरा हो गया उन्हें हटाया गया है। ऐसे झोल-झाल भरे इंतजामों से यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा के इंतजाम कैसे होंगे? यह तो तब है जब अपने भाषणों में हमारे नीति-नियंता देश के युवाओं को देश का भविष्य बताने की बातें करते नहीं थकते। यह बात सही है कि आज भी हमारे यहां उच्च शिक्षा केन्द्रों की कमी है। लेकिन जहां कॉलेज खोले गए हैं, वहां पर्याप्त शिक्षक हों, यह देखना तो सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन, हो यह रहा है कि राजनीतिक दबाव में हर साल नए कॉलेज खोलने की घोषणाएं तो खूब होती हैं, लेकिन इनमें शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की बात कोई नहीं करता।


हमारे नीति-नियंताओं को यह तो सुनिश्चित करना ही होगा कि लोक-लुभावन घोषणाओं की बजाय वे युवाओं को अच्छी शिक्षा देने के इंतजाम करें। पद खाली रख पैसा बचाने की नौकरशाही की कतर ब्योंत भरी चालों से खुद को बचाते हुए महाविद्यालयों में जल्द से जल्द स्थायी शिक्षकों का इंतजाम करना जरूरी है। जब तक ऐसा नहीं हो, तब तक विद्या संबल योजना के तहत नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति सत्र पर्यन्त सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थी आवश्यकतानुसार अपने शिक्षकों से परामर्श ले सकें। महाविद्यालयों में पूरी कक्षाएं लगें, छात्र-छात्राएं नियमित और पूरे समय कक्षाओं में आएं, महाविद्यालयों में शैक्षणिक और सह शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक माहौल बने, इस सब के लिए महाविद्यालयों में शिक्षकों के पदों का पर्याप्त संख्या में स्वीकृत होना और उन स्वीकृत पदों पर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति होना अत्यावश्यक है। ऐसा नहीं करना, इस जिम्मेदारी से मुंह चुराना और प्रदेश की युवा पीढ़ी के साथ खिलवाड़ करना होगा।

शिक्षकों की कमी पड़ रही है उच्च शिक्षा पर भारी, नए कॉलेज खोलने की घोषणाएं तो खूब होती हैं, लेकिन इनमें शिक्षा की गुणवत्ता की बात कोई नहीं करता Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP BASIC NEWS

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