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शुक्रवार, 3 मार्च 2023

सरकारी कार्मिकों के लिए समग्र तबादला नीति क्यों नहीं?



 सरकारी कार्मिकों के लिए समग्र तबादला नीति क्यों नहीं?

तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप रहते उम्मीद करना व्यर्थ है कि तबादलों के काम में भ्रष्टाचार नहीं होगा सरकार चाहे किसी भी राजनीतिक दल की हो, सरकारी कार्मिकों के तबादलों का काम अपने हाथ में ही रखना चाहती है। यानी बिना किसी कानून-कायदे के। इसीलिए हर बार तबादलों के दौर में भ्रष्टाचार की शिकायतें खूब होती हैं। विधानसभा के बाहर कई बार तृतीय श्रेणी शिक्षकों की तबादला नीति बनाने का ऐलान करने वाले शिक्षा मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने अब विधानसभा में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लिए तबादला नीति जल्दी ही लागू करने की घोषणा की है। अभी तो यह भी पता नहीं है कि यह नीति बनकर तैयार भी है या नहीं। अब चूंकि मंत्री ने सदन में ऐलान किया है, इसलिए भरोसा किया जा सकता है कि जल्द ही शिक्षकों को तबादलों के संत्रास से राहत मिलेगी।  


चिंता की बात यह है कि मौजूदा सरकार के चार साल से ज्यादा का कार्यकाल पूरा होने पर भी तबादला नीति लाल फीतों में बंद होकर रह गई। आज भी कई प्रतिबंधित जिलों में अरसे से काम कर रहे शिक्षकों को इच्छित स्थान पर तबादले का इंतजार है। सवाल यह भी उठता है कि क्या सरकार के सभी कार्मिकों के लिए तबादला नीति नहीं होनी चाहिए? यह सवाल इसलिए भी कि हर बार तबादलों पर प्रतिबंध हटते ही विधायकों और दूसरे जनप्रतिनिधियों की पौ-बारह हो जाती है। तबादलों का डर बैठाकर भ्रष्टाचार की गंगा बहाने में माननीयों के भी नाम आते रहते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद तबादलों में रिश्वतखोरी को लेकर सार्वजनिक रूप से शिक्षकों से सवाल कर चुके हैं।


विडंबना यह है कि सरकारी कर्मचारियों को पाबंद किया जाता है कि वे अपने तबादलों व पदस्थापन के लिए डिजायर नहीं कराएंगे। लेकिन, यह किसी से छिपा नहीं कि आज भी हमारे प्रदेश में विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों की डिजायर पर ही तबादले किए जाते हैं। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि विधायकों को मंत्रियों से ज्यादा ताकतवर बना दिया गया है। सरकार चाहे भाजपा की हो या कांग्रेस की, डिजायर पर ही ज्यादातर तबादले होते आए हैं। एक पहलू यह भी है कि तबादला नीति के अभाव में कई महकमों में बरसों से कर्मचारी—अधिकारी एक ही कुर्सी पर जमे रहते हैं। शहरी निकायों से लेकर पुलिस, चिकित्सा, पानी, बिजली सहित ऐसा कौन सा महकमा है, जहां बिना राजनीतिक दखल के कोई तबादला नहीं होता हो। तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप रहते उम्मीद करना व्यर्थ है कि तबादलों के काम में भ्रष्टाचार दूर हो सकेगा

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