आरटीई बनी छलावा: फीस वसूली की गली निकाल रहे निजी स्कूल
जयपुर. प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई प्रवेश को लेकर सरकार और निजी स्कूलों के विवाद में अभिभावक फंस रहे हैं। शिक्षा विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन निजी स्कूलों को आरटीई पुनर्भरण राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा। ऐसे में निजी स्कूलों ने फीस वसूलने के लिए गली निकाली है।चयनित बच्चों के अभिभावकों से राजधानी के कुछ निजी स्कूल शपथ पत्र पर हस्ताक्षर ले रहे हैं। इसमें लिखा है कि सरकार अगर आरटीई पुनर्भरण राशि का भुगतान नहीं करती है तो अभिभावकों से स्कूल फीस वसूलने का हकदार होगा। राज्य में 2 लाख 20 हजार 257 बच्चों ने 8 लाख 49 हजार 269 आवेदन किए हैं। इधर, निजी स्कूल प्रवेश नहीं देने पर अड़े हैं। स्कूलों का तर्क है कि अगर सरकार आरटीई का भुगतान नहीं करेगी तो प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसे लेकर कुछ निजी स्कूल कोर्ट भी गए हैं।
कार्रवाई होगी
निजी स्कूल न तो कोई एग्रीमेंट कर सकते हैं और न फीस ले सकते हैं। कोई अभिभावक पीड़ित है तो वह डीईओ को शिकायत दे सकता है। कार्रवाई करेंगे। -गौरव अग्रवाल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा
कोर्ट निर्णय करेगा
एडमिशन एक्ट के विरुद्ध हैं। सरकार को हमने पत्र लिखा है और जवाब मांगा है, ताकि एक्ट के अनुरूप एडमिशन हो सकें। सत्र समाप्ति पर कैसे बच्चों को लिया जा सकता है? बिना भुगतान एडमिशन नहीं करेंगे। कोर्ट का फैसला आने पर ही निर्णय लेंगे। -हेमलता शर्मा, अध्यक्ष स्कूल क्रांति संघ
ढाई हजार दो, नंबर नहीं तो लौटा दी जाएगी राशि
राजधानी में कुछ निजी स्कूल अभिभावकों से एग्रीमेंट के साथ फीस भी वसूल रहे हैं। अभिभावकों से कहा जा रहा है कि बच्चे का प्रवेश अगर आरटीई में नहीं होता है तो फीस लौटा दी जाएगी। प्रवेश होने पर राशि स्कूल रखेगा। शास्त्रीनगर थाने के पास स्थित निजी स्कूल में अभिभावकों ने राशि लेने का विरोध किया है।
पूरी प्रक्रिया पर संकट
स्कूलों में नया सत्र अप्रेल से शुरू होने जा रहा है। वहीं, शिक्षा विभाग अभी सत्र 2022-23 में प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने में लगा है। ऐसे में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया पर संकट बना है। विभाग को बुधवार तक सीटों का आवंटन करना था। लेकिन अब यह प्रक्रिया गुरुवार को होगी। उधर, निजी स्कूलों का तर्क है कि 21 मार्च को कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रक्रिया पूरी होगी।

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