रीट का परिणाम आते ही 45 दिन में 48 हजार पदों पर देंगे नौकरी : कल्ला
जयपुर, 9 अप्रैल। शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने कहा है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जिस दिन हमारे पास रीट मैंस (शिक्षक भर्ती) के परिणाम आ जाएंगे। उसके ठीक 45 दिन के अंदर-अंदर हम 48 हजार पदों पर नौकरी देने की पूरी कोशिश करेंगे। परिणाम के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में कुछ वक्त लगता है। लेकिन, जैसे ही रिजल्ट आएगा। हम जिलेवार प्रक्रिया शुरू कर जल्द से जल्द पोस्टिंग देने का काम करेंगे।
शिक्षा मंत्री कल्ला ने यह बात एक निजी चैनल से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने शिक्षा विभाग में 80 हजार से ज्यादा पदों पर अब तक नौकरी दे दी है। 48 हजार पदों पर जैसे ही रीट का रिजल्ट आएगा। उन्हें भी पोस्टिंग दे देंगे। वरिष्ठ अध्यापकों को नौकरी दे रहे हैं। बल्कि, इस वित्तीय वर्ष में राजस्थान का शिक्षा विभाग एक लाख लोगों को नौकरी दे देगा। विपक्ष बातें करता रहेगा और हम काम करते रहेंगे। करीब दस हजार कंप्यूटर अनुदेशक के पदों पर भर्तियां जारी है। इसके अलावा 6000 शारीरिक शिक्षकों के पदों पर भर्तियां होंगी। वरिष्ठ अध्यापकों के साथ ही 8000 पदों पर भर्तियां होंगी। महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल में भी 10 हजार टीचर्स की भर्तियां की जाएंगी। इसके साथ ही स्कूल व्याख्याता की भर्ती भी की जाएंगी। ऐसे में राजस्थान के शिक्षा विभाग में एक लाख पदों पर शिक्षकों की कुल भर्ती का काम चल रहा है।
कल्ला ने कहा कि ग्रेड थर्ड टीचर्स के ट्रांसफर होने की पूरी-पूरी संभावना है। हमने ट्रांसफर पॉलिसी बनाकर कार्मिक विभाग को भेज दी है। कार्मिक विभाग ने उस पर कुछ क्वेरी की थी। उसका भी जवाब भेज दिया गया है। अभी सभी विभागों में ट्रांसफर बंद है। ऐसे में कार्मिक विभाग से हमारी पॉलिसी को स्वीकृति मिलने के बाद जैसे ही ट्रांसफर खुलेंगे। उसके बाद जैसे हमने ग्रेड सेकेंड और ग्रेड फर्स्ट के ट्रांसफर किए हैं। उसी तर्ज पर ग्रेड थर्ड के ट्रांसफर भी कर दिए जाएंगे। क्योंकि इस बार हमने जो पॉलिसी बनाई है। वह बहुत ठोस और अच्छी है। हमारी सरकार संवेदनशील है। इसलिए हम चाहते हैं कि जो शिक्षक बरसों से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें हम राहत दे सकें। सरकार जल्द ही निजी शिक्षण संस्थाओं के लिए प्राधिकरण बनाने की प्लानिंग कर रही है। इसमें शिक्षा विभाग से जुड़ी समस्याओं की सुनवाई होगी। प्राधिकरण में अभिभावकों को भी सुना जाएगा। जो संस्थाएं होगी, उन्हें भी सुना जाएगा। इसके बाद जो प्राधिकरण फाइनल फैसला करेगा। उसे सबको मानना पड़ेगा। ऐसे में हम जल्द से जल्द प्राधिकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ताकि इस तरह की समस्याओं से निजात मिल सके।

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