कुक कम हेल्पर के मानदेय में बढ़ोतरी:261 रूपए की बढ़ोतरी, कर्मचारी बोले- घर खर्च भी नहीं चलेगा
कामकाज बढ़ाकर भी सरकार ने कुक कम हेल्पर का मान नहीं रखा है। मानेदय बढ़ोतरी के नाम पर महज 261 रूपए बढ़ाए गए हैं। इससे स्थायीकरण और फिक्स वेतन की मांग कर रहे कुक कम हैल्पर की उम्मीदें धरी रह गईं।पहले कुक कम हैल्पर को 1742 रुपए मासिक दिए जा रहे थे। अब अप्रैल से उनको 2003 रुपए मानदेय दिया जाएगा। इतने कम मानदेय में कुक कम हेल्पर सरकारी होने की आस में तथा पगार बढ़ने की प्रतीक्षा में अर्द्धकुशल मजदूरों से भी कम मानदेय पर जिंदगी काट रहे हैं।
उनको तीस दिन हाजिरी भरने के बाद भी बेरोजगार भत्ते से कम रुपए मिल रहे हैं। हर साल मानदेय में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी का नियम तो इन पर कभी लागू ही नहीं किया गया।वहीं पिछले चार बरस की बात करें तो महंगाई कहां की कहां पहुंच गई। लेकिन कुक कम हैल्पर का मानदेय 1320 से 2003 तक ही बढ़ सका है मतलब 683 रुपए कुल। कर्मचारी इसे ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर बता रहे है, उनका कहना है कि इतने कम मानदेय में घर खर्च चलना भी मुश्किल है, जबकि पहले से ज्यादा काम करवाया जा रहा है।
कामकाज बढ़ा
कुक कम हैल्पर मिड डे मील के तहत विद्यार्थियों के लिए भोजन बनाते हैं। मुख्यमंत्री बाल गोपाल दूध योजना के तहत विद्यालयों दूध वितरण शुरू होने के बाद कुक कम हैल्पर का कामकाज बढ़ गया है। मगर उसके अनुपात में मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। दूध वितरण के लिए विद्यालय में तीन कुक कम हैल्पर होने पर उनको 500 रुपए मासिक दिए जाते हैं। इसको वे आपस में बांट लेते हैं।मिड डे मील आयुक्त डॉ. एमएल यादव ने कुक कम हैल्पर के मानदेय में 261 रुपए की बढ़ोतरी का आदेश जारी किया है। बढ़ा हुआ मानदेय इसी महीने यानी अप्रैल से मिलेगा। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत राज्य सरकार ने स्वयं के संसाधनों से यह बढ़ोतरी की है।
काम में कुशल, मजदूरी में नहीं
दो दशक से मिड डे मील योजना के तहत कुक कम हेल्पर विद्यालयों में रसोई संभाल रहे हैं। यह सैकड़ों बच्चों का खाना बनाने से लेकर परोसने तथा रसोई में झाडू-पोंछा करने का जिम्मा संभालते हैं। अपने कार्य में कुशल हैं।मगर सरकार इनको अर्द्धकुशल मजदूर के समान भी मानदेय नहीं दे रही है। विद्यालयों में 50 विद्यार्थियों पर एक, 100 पर दो तथा 150 पर तीन कुक कम हैल्पर रखने का प्रावधान है। सरकारी मापदंडों के अनुसार अर्द्धकुशल व कुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम करीब सवा दो सौ से दो सौ साठ रुपए दिहाड़ी तय है।

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