इंतहा हो गई, इंतजार की, न पदोन्नति हुई न पद हुए स्वीकृत
चूरू. शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता की पिछले तीन सत्र से डीपीसी बकाया चल रही है । ऐसे में समय पर डीपीसी नहीं होने व क्रमोन्नत विद्यालयों में व्याख्याता पदों की वित्तीय स्वीकृति नहीं होने से रिक्त पदों का ग्राफ बिगड़ रहा है। जिसका खमियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा। शिक्षा विभाग में विभिन्न संवर्गो के प्रति वर्ष रिक्त होने वाले पदों के 50 प्रतिशत सीधी भर्ती व 50 फीसदी विभागीय पदोन्नति से भरे जाने का प्रावधान है।
लेकिन माध्यमिक शिक्षा में वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता की विभागीय पदोन्नति पिछले तीन सत्र से बकाया है। ऐसे में व्याख्याताओं के रिक्त पदों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। अभी हाल ही 10 हजार व्याख्याताओं के वॉइस प्रिंसिपल पदों पर पदोन्नति होने से व्याख्याताओं के रिक्त पदों की संख्या बढ़ गई है ।
प्रतिवर्ष 1 अप्रेल के आधार पर विभागीय डीपीसी की जाती है। लेकिन पिछले तीन सत्र 2021-22, 2022-23 व 2023-24 की डीपीसी बकाया होने से 15 हजार वरिष्ठ अध्यापकों की व्याख्याता पदों पर पदोन्नति नहीं हो पा रही है। ऐसे में स्कूलों में परेशानी हो रही है।
क्रमोन्नत विद्यालयों में स्वीकृति का इंतजार
पिछले वर्ष मार्च में माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत किए गए 3800 विद्यालयों में एक साल बाद भी व्याख्याता पदों की वितीय स्वीकृति जारी नहीं की गई है। इसके अलावा उच्च प्राथमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत 1 हजार विद्यालयों सहित क्रमोन्नत कुल 5000 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रति विद्यालय 3 व्याख्याता के हिसाब से 15 हजार व्याख्याता पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं हो पाई है। यदि अप्रेल व मई माह में वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता की डीपीसी नहीं होती है। तो आगामी सत्र में विद्यालय खुलने पर व्याख्याताओं का टोटा रहेगा। जिसका खामियाजा इन विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा।
वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता की तीन सत्रों से बकाया चल रही विभागीय डीपीसी प्रक्रिया शीघ्र की जाए ताकि व्याख्याता के रिक्त पदों को भरा जा सके। साथ ही क्रमोन्नत 5000 विद्यालयों में व्याख्याता पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी की जाकर 50 प्रतिशत पदों को विभागीय पदोन्नति से भरा जाए।-बसन्त कुमार ज्याणी, प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा
प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग में 2015 में लागू स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा 8 साल बाद एक बार भी नहीं हुई है । 2015 में लागू किए स्टाफिंग पैटर्न के बिंदु 5.4 के अनुसार यह प्रावधान किया था कि प्रति 2 वर्ष बाद विद्यालयों के नामांकन के आधार पर स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा करते हुए नामांकन में कमी या वृद्धि होने पर पदों का पुन: निर्धारण करते हुए नामांकन अनुसार पदों का सर्जन किया जाएगा। लेकिन माध्यमिक शिक्षा विभाग में स्टाफिंग पैटर्न लागू होने के बाद 8 साल में एक बार भी इसकी समीक्षा नहीं हुई है।
इस अवधि में शिक्षा विभाग में नामांकन में भी काफी वृद्धि हुई है। हालांकि कुछ विद्यालयों के नामांकन में कमी भी हुई है। लेकिन ऑल ओवर नामांकन बढ़ा है। ऐसे में विद्यालयों में 2015 के नामांकन अनुसार ही पदों का निर्धारण किया हुआ है । उसके बाद नामांकन अनुसार पदों का पुन: निर्धारण करने के लिए स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा की जानी है। यदि स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा की जाए तो माध्यमिक शिक्षा विभाग में अध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता के पदों में वृद्धि हो सकती है।
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