RPSC Paper Leak: RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा समेत तीन को SOG ने हिरासत में लिया, जानिए कौन है कटारा?
राजस्थान में पेपर लीक मामले में आरपीएससी सदस्य बाबू लाल कटारा को जांच एजेंसी एसओजी ने हिरासत में लिया है। आरोपी शेरसिंह मीना और कटारा के बीच करीबी संबंध बताए जा रहे हैं। एटीएस एवं एसओजी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि वरिष्ठ अध्यापक माध्यमिक शिक्षा विभाग प्रतियोगि परीक्षा 2022 में पेपर लीक में की गई कार्यवाही में आरपीएससी सदस्य बाबू लाल कटारा, गोपाल सिंह चालक और बाबूल लाल कटारा के भांजा विजय कटारा को हिरासत में लिया गया है। इनसे गहन पूछताछ की जा रही है। अजमेर स्थित इनके निवास स्थलों से दस्तयाब किया गया है। जबकि विजय कटारा को डूंगरपुर से गिरफ्तार किया है।
शेर सिंह कटारा के संपर्क में था
कुछ दिन पहले ही पेपर बेचने वाला शेर सिंह मीणा गिरफ्तार हुआ था। शेरसिंह मीणा ने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक करने के लिए आरपीएससी मेंबर बाबूलाल कटारा से संपर्क किया। उस समय बाबूलाल कटारा उदयपुर के आदिम जाति शोध संस्थान के निदेशक पद पर कार्यरत था।शेरसिंह मीणा को पता था कि बाबूलाल कटारा आने वाले समय में आरपीएससी में प्रमोट होकर मेंबर बन सकता है। आरपीएससी में सेंध लगाने के लिए वह बाबूलाल कटारा से लगातार संपर्क में रहा।
इस दौरान 15 नवंबर 2020 को बाबूलाल कटारा आरपीएससी का मेंबर बना। इसके बाद दोनों की नजदीकी और ज्यादा बढ़ गई।एसओजी सूत्रों के मुताबिक शेरसिंह मीणा ग्रेड सेकेंड भर्ती परीक्षा की तैयारियों के समय कटारा से लगातार संपर्क में रहा। इस दौरान वह भर्ती परीक्षा का पेपर लीक करने का प्रयास कर रहा था। भर्ती परीक्षा का पेपर आते ही उसने पेपर करीब एक करोड़ रुपए में भूपेंद्र सारण को बेच दिया था।इसके बाद भूपेंद्र सारण ने 20 लाख रुपए का अपना कमीशन रखकर पेपर सुरेश ढाका को बेच दिया। सुरेश ढाका ने पेपर अपने साले सुरेश विश्नोई को दिया था। सुरेश विश्नोई ने वह पेपर अभ्यर्थियों को पांच से आठ लाख रुपए में बेचा था।
जानिए कौन है बाबूलाल कटारा
मूलत: डूंगरपुर निवासी कटारा उदयपुर टीआरआई के निदेशक (सांख्यिकी) है। डूंगरपुर जिले से कटारा तीसरे व्यक्ति है, जो आरपीएससी मेम्बर बने है। वर्ष 1993 में वागड़ के कद्दावर नेता भीखाभाई की पुत्री कमला भील पहली बार आरपीएससी सदस्य बनी थी। इसके दो साल बाद वर्ष 1995 में भाजपा के वरिष्ठ नेता शंकरसिंह सोलंकी मेम्बर बने।
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