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मंगलवार, 6 जून 2023

नौनिहालों के पांवों में पड़ गए थे छाले, फिर भी बोर्ड परीक्षाओं में जिला हो गया पैदल

 

नौनिहालों के पांवों में पड़ गए थे छाले, फिर भी बोर्ड परीक्षाओं में जिला हो गया पैदल

बीकानेर. पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था का संचालन करने के लिए बना शिक्षा निदेशालय भी बीकानेर जिले के बोर्ड परीक्षा परिणामों में कोई फर्क नहीं डाल पाया। इतना ही नहीं, पूरे विभाग के मुखिया यानी शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला का गृह जिला भी बीकानेर ही है। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर की ओर से जारी परीक्षा परिणाम जिले में पटरी से उतर चुकी शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलते दिखाई देते हैं।


काबिलेगौर है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर छोटे-छोटे बच्चों-किशोर उम्र छात्र-छात्राओं का ऐतिहासिक पैदल मार्च भी इसी बीकानेर जिले में हुआ। मानो वह खतरे की घंटी थी। महकमा फिर भी नहीं चेता। नतीजा सामने है। आलम यह है कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर के सभी परीक्षा परिणामों में बीकानेर फिसड्डी साबित हुआ है। टॉप टेन में शामिल होना तो दूर, कुछ-एक में तो जिला सबसे निचले पायदान पर आने की जद्दोजहद से ही जूझता नजर आया।


इस स्याह तस्वीर की इकलौती उजास सिर्फ यही है कि जिले के विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार, सीनियर सैकंडरी परीक्षा के तीनों संकायों का रिजल्ट 90 प्रतिशत के आसपास रहा है। हालांकि सैकंडरी परीक्षा में जिले का परिणाम 90 फीसदी से भी कम रहा है। यहीं स्थिति पांचवीं तथा आठवीं बोर्ड परीक्षा में भी देखने को मिली।


कारण क्या: पूरे साल बनी रही शिक्षकों के रिक्त पदों की समस्या, अंत तक जूझते रहे बच्चे

किसी भी स्कूल का परिणाम वहां के स्टाफ पर निर्भर रहता है। जब स्टाफ ही पूरा नहीं होगा, तो बेहतर परिणाम का सपना ही देख सकते हैं। परिणाम बेहतरीन नहीं रहने का नतीजा है कि प्रदेश में एक भी परीक्षा में जिला टॉप टेन में शामिल नहीं है। पांचवी बोर्ड परीक्षा में तो जिला 30 पायदान पर लुढ़क गया। गौरतलब है कि परीक्षा से कुछ महीने पहले तक कई ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण ग्रामीण तथा विद्यार्थियों ने जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च भी निकाला। लूणकरनसर तहसील क्षेत्र से पैदल आए विद्यार्थियों के पैरों में फफोले तक पड़ गए थे। स्टाफ का टोटा कोलायत, नोखा, श्रीडूंगरगढ़ तथा खाजूवाला क्षेत्र के कई स्कूलों में भी होने का मुद्दा उठता रहा है। जबकि इन स्कूलों के विद्यार्थियों ने पढ़ाई के लिए स्कूलों पर ताले भी लगाए और अपनी बात शासन-प्रशासन तक भी पहुंचाई थी।


एक्सपर्ट व्यू : शिक्षकों की कमी बड़ी समस्या

जब तक शिक्षकों के पदों को नहीं भरा जाएगा, तब तक बीकानेर जिले के परीक्षा परिणाम में कोई सुधार नहीं होगा। यह अजमेर बोर्ड की सूची में टॉप टेन तक भी नहीं पहुंच पाएगा। जिले के ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षकों के रिक्त पदों की बड़ी समस्या है। सरकार ने स्कूल भी खोल दिए और विषय भी स्वीकृत कर दिए, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं लगाए। न तो पदोन्नति समय पर हो रही है और न ही विषय अध्यापक लगाए जा रहे हैं। सरकारी स्कूल का विद्यार्थी दसवीं कक्षा में अन्य विषय तो स्वयं पढ़ सकता है, लेकिन गणित, अंग्रेजी तथा विज्ञान स्वयं पढ़ने में दिक्कत होती है। सीनियर सैकंडरी के विज्ञान संकाय में बायोलॉजी, मैथ्स तथा फिजिक्स आदि विषय भी विद्यार्थी स्वयं नहीं पढ़ सकते हैं। यहीं हाल वाणिज्य संकाय में भी होता है। सरकार को इन विषयों के शिक्षकों के पद तो भरने ही चाहिए। अधिकांश विद्यार्थी इन विषयों में ही अनुत्तीर्ण अथवा पूरक आते हैं। जब तक इन विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाती, तब तक जिले से बेहतर परिणाम की आशा रखना बेमानी होगा। बोर्ड की सूची में जिले का नाम टॉप टेन में लाना है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने होंगे।- डॉ. विजयशंकर आचार्य, पूर्व संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग




बोर्ड के परिणामों में बीकानेर का स्थान


सीनियर सैकंडरी परीक्षा परिणाम


संकाय विद्यार्थियों की संख्या उर्त्तीण प्रतिशत स्थान

कला 28952 26672 92.12 18वा

वाणिज्य 1298 1261 97.15 12वां

विज्ञान 5399 5113 94.70 20वां

सैकंडरी परीक्षा 40578 35698 89.90 17वां

8वीं बोर्ड परीक्षा 50722 47544 93.73 21वां

5वीं बोर्ड परीक्षा 56611 54324 96.52 30वां

नौनिहालों के पांवों में पड़ गए थे छाले, फिर भी बोर्ड परीक्षाओं में जिला हो गया पैदल Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP BASIC NEWS

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