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शनिवार, 8 जुलाई 2023

महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से जुड़ी है ये लापरवाही , 165 स्कूलों में नहीं पहुंचीं किताबें, सात दिन से 15 हजार बच्चे बिना पढ़े लौट रहे, अगले माह टेस्ट भी



 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से जुड़ी है ये लापरवाही , 165 स्कूलों में नहीं पहुंचीं किताबें, सात दिन से 15 हजार बच्चे बिना पढ़े लौट रहे, अगले माह टेस्ट भी

गहलोत सरकार शिक्षा में नवाचार के साथ लगातार हिंदी माध्यम की स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदल रही है। लेकिन इन स्कूलों में शैक्षणिक सुविधाएं मुहैया नहीं करवा पा रही है। नया शिक्षा सत्र शुरू होने के सात दिन बाद भी 165 स्कूलों में किताबें नहीं पहुंच पाई है। इन स्कूलों में 15 हजार बच्चे बिना पढ़ाई करे सिर्फ खेल-कूद व पोषाहार लेकर घर लौट रहे हैं। 165 में से 75 स्कूल इसी साल महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम में कन्वर्ट को हैं। यहां एक भी किताब नहीं हैं। जबकि स्कूलों में 30 जून तक किताबें पहुंच जानी चाहिए थी।


शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स को पाठ्य पुस्तक निशुल्क मुहैया करवाता है। वर्तमान जिले में 165 अंग्रेजी माध्यम की स्कूल हैं। इनमें से 90 स्कूलों में महज 50 फीसदी कोर्स ही उपलब्ध है। नई खोली गई 75 स्कूलों में एक भी किताब नहीं पहुंची हैं। 6वीं से 10वीं कक्षा तक के सिलेबस में कई चेप्टर बदल चुके हैं। ऐसे में बच्चे पुरानी किताबों से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। जिले की स्कूलों में डेढ़ लाख किताब पहुंचाई जानी हैं। आमतौर पर स्टूडेंट्स रिजल्ट के बाद अगली क्लास में पहुंचने पर पुरानी पुस्तकें स्कूल में वापस जमा करवा देते हैं। इनमें से सही किताबें स्टूडेंट्स को वापस अलॉट कर दी जाती है। वहीं नामांकन बढ़ने, सिलेबस में बदलाव सहित अन्य जरूरत के मुताबिक नई किताबें और मंगवाई जाती है


चिंता : बोर्ड स्टूडेंट्स के सामने समय पर कोर्स पूरा करना बड़ी चुनौती

शैक्षिक कैलेंडर के मुताबिक शिक्षा सत्र से लेकर क्लास टेस्ट सहित अन्य गतिविधियां पहले से तय होती है। इनमें से किसी एक भी चीज पर देरी होने से पूरा शिक्षा सत्र प्रभावित हो जाता है। अभी पाठ्य पुस्तक पहुंचने में करीब एक सप्ताह लगेगा। ऐसे में शिक्षा सत्र के शुरुआत 15 दिन बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित रहेगी। जबकि अगस्त में क्लास टेस्ट होने हैं। बच्चों को बिना पढ़े टेस्ट देना होगा। इस हालात में बच्चों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। सबसे ज्यादा परेशानी 10वीं व 12वीं बोर्ड के बच्चों के सामने है। क्योंकि निजी स्कूलों में बोर्ड क्लास की पढ़ाई करीब एक महीने पहले ही शुरू हो चुकी है। राजकीय महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय पलसाना की शिक्षिका दीपिका ने बताया कि स्कूल में पूरी किताबें नहीं हैं। रूपगढ़ स्कूल के प्रधानाचार्य सत्यनारायण कुमावत ने बताया कि किताबें नहीं आने से स्कूली बच्चें सिर्फ खेल- -कूद गतिविधियों में हिस्सा लेकर वापस लौट रहे हैं। किताबों के लिए दो से तीन बार उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। गोकुलपुरा महात्मा गांधी स्कूल के शिक्षक देवेंद्र खीचड़ ने बताया कि सी आधी अधूरी किताब होने से स्टूडेंट और शिक्षक दोनों परेशान है।


इसलिए देरी.... रूट चार्ट बनाकर विद्यालय नहीं पहुंचा रहे पुस्तकें

सूत्रों के मुताबिक विभाग की ओर से पुस्तकों को रूटचार्ट बनाकर विद्यालय तक पहुंचाना होता है। जबकि पुस्तक को पीईओ तक ही पहुंचाया जाता है। वहां से एचएम को इसे यहां से विद्यालय ले जाना पड़ता है। शिक्षकों ने बताया कि अभी केवल 1, 2 व 3 के बच्चों का पुस्तक हैं।


सीकर में 6.50 लाख किताबों की डिमांड थी। इनमें से करीब 5 लाख किताबें वितरित की जा चुकी है। शेष बची हुई डेढ लाख किताबें अगले सप्ताह तक सभी स्कूलों में पहुंचा दी जाएगी।सुभिता चौधरी, मुख्य प्रबंधक, पुस्तक मंडल विभाग सीकर पुस्तक मंडल जयपुर से किताबें देरी से आने के कारण स्कूलों में समय पर नहीं पहुंच पाई। जल्दी स्कूलों में किताबें पहुंचा दी जाएगी।-विनोद जानू, जिला शिक्षा अधिकारी समसा

महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से जुड़ी है ये लापरवाही , 165 स्कूलों में नहीं पहुंचीं किताबें, सात दिन से 15 हजार बच्चे बिना पढ़े लौट रहे, अगले माह टेस्ट भी Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP BASIC NEWS

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