चुनावी साल की ताबड़तोड़ घोषणाएं:4-4 कमरों वाले 4 यूपीएस को बनाया उच्च माध्यमिक, बच्चों के लिए पहले ही जगह नहीं, वरिष्ठ शिक्षकों का भी पता नहीं
चुनावी साल में पिटारा खोलकर सौगातें दे रही राज्य सरकार ने प्रदेश के 102 राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों (यूपीएस) को सीधे ही 12वीं में क्रमोन्नत कर दिया है। इनमें उदयपुर के 4 स्कूल भी हैं। घोषणा ने शिक्षा विभाग और अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि कोई कुछ भी कहने तो तैयार नहीं है। परेशानी की वजह ये है कि इन यूपीएस में सुविधाओं के नाम पर कुछ है ही नहीं। कई स्कूल तो महज 4 कमरों में चल रहे हैं और जहां कमरे ज्यादा हैं तो उनमें भी पानी टपक रहा है या जर्जर हैं। माध्यमिक कक्षाओं को पढ़ाने के लिए वरिष्ठ अध्यापकों की कोई व्यवस्था तक नहीं है और न इसे लेकर कोई दिशा निर्देश हैं। उदयपुर में प्रमोट किए गए 4 में से 3 स्कूलों की पड़ताल की। सामने आया कि सबसे बड़ी चुनौती तो 9वीं कक्षा में एडमिशन की है। बच्चों की संख्या पर्याप्त करने के दावों की हकीकत ये है कि 50 फीसदी तक बच्चे दूसरे स्कूलों में प्रवेश ले चुके हैं और कुछ ने निजी स्कूलों में भी दाखिला ले लिया है। महज 25 प्रतिशत बच्चे नए क्रमोन्नत स्कूल में प्रवेश लेने की स्थिति में है। बता दें, पिछले सप्ताह ही सरकार ने प्रदेश में 102 स्कूलों को क्रमोन्नत कर उच्च माध्यमिक का दर्जा दिया है। वहीं उदयपुर में 4 स्कूलों को राजकीय उच्च माध्यमिक स्तर पर क्रमोन्नत कर दिया था। उदयपुर में काटवी, पालिया, आलूखेड़ा और मयादा यूपीएस प्रमोट हुए हैं।
विभाग नहीं, जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर स्कूल प्रमोट
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि स्कूलों को क्रमोन्नत करने के प्रस्ताव विभाग ने नहीं दिए थे। ये प्रस्ताव मौजूदा जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस नेताओं ने भेजे थे। सरकार ने घोषणा तो कर दी, लेकिन उपलब्ध सुविधाओं की ओर नहीं देखा। इधर, शिक्षक संगठन सरकार से सुविधाएं बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं।
काटवी यूपीएस : 9 में से 6 कमरों में टपक रही छतें, 3 में लग रही क्लास
संस्था प्रधान हेमंत गरासिया ने बताया कि आठवीं में 29 बच्चे थे। स्कूल क्रमोन्नत होते ही इन्हें रोक लिया है। अभी बहुत कम बच्चे आ रहे हैं। हमारे यहां कमरे जर्जर हैं। बारिश में छतें टपकती हैं। 5 कमरे तो तत्काल चाहिए। प्रिंसिपल रूम, स्टाफ रूम, लाइब्रेरी हॉल भी जरूरी होंगे। 9 में से 3 कमरों में ही बच्चों को बैठा सकते हैं। 6 शिक्षक हैं। वरिष्ठ शिक्षकों को लेकर कोई जानकारी नहीं है।
पालिया यूपीएस : जिन्हें टीसी जारी की थी, अब उन्हें वापस बुलवा रहे
प्रधानाध्यापक रमेशचंद्र मीणा ने बताया कि 8वीं में 23 बच्चे थे। सबने टीसी ले ली थी, लेकिन उन्हें वापस ला रहे हैं। स्कूल में 4 कमरे हैं। कम से कम 10 कमरे और चाहिए, तब जाकर 10वीं तक की कक्षाएं लगा सकते हैं। सभी 6 शिक्षक तृतीय श्रेणी के हैं। संस्था प्रधान का पद भी खाली है। मुझे चार्ज दिया है। वरिष्ठ शिक्षकों को लेकर अधिकारियों की ओर से अभी कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
आलूखेड़ा यूपीएस : बच्चों को रोक लिया, 10 कमरों की जरूरत और
संस्था प्रधान भीखाराम ने बताया कि 8वीं पास 30 बच्चों की टीसी जारी कर दी थी, लेकिन हमारे पास ही रखी। स्कूल क्रमोन्नत होने का अनुमान था। अभी इन्हीं बच्चों के एडमिशन करेंगे। अभी 5 कमरे हैं। कुछ समय पहले ही विधायक की सिफारिश पर 2 की स्वीकृति मिली थी। फिर भी कमरे 10 और चाहिए। पीटीआई समेत 7 शिक्षक हैं। नए और वरिष्ठ शिक्षकों के बारे में पता नहीं।
उदयपुर में 24, प्रदेश में 612 विषय अध्यापक चाहिए, 51 करोड़ भी
क्रमोन्नत विद्यालयों में 6-6 विषय अध्यापकों की जरूरत है। प्रदेश में 612 शिक्षक चाहिए। तभी 9वीं और 10वीं कक्षा में पढ़ाया जा सकता है। मौजूदा शिक्षक लेवल प्रथम और द्वितीय के हैं। माध्यमिक कक्षाओं के परिणाम बच्चों के लिए मायने रखता है। ऐसे में शिक्षकों की व्यवस्था सबसे बड़ा सवाल है। उदयपुर में क्रमोन्नत 4 स्कूलों में कमरे 4 से 5 ही हैं। उच्च माध्यमिक के लिए 15 चाहिए। यानी सभी स्कूलों में 10 कमरों की जरूरत है। एक कमरे की औसत लागत 5 लाख रुपए है। ऐसे में प्रदेश भर में 1020 कमरे बनवाने के लिए 51 करोड़ रुपए चाहिए। वरिष्ठ अध्यापकों की ही तरह बजट को लेकर अभी तक कोई दिशा निर्देश नहीं हैं। हालांकि विधायक या सांसद मद से विभाग स्थानीय स्तर पर व्यवस्था कर सकता है। बजट मिलने के साथ हाथोहाथ काम शुरू किया, तब भी टेंडर प्रक्रिया, वर्क ऑर्डर के बाद पूरा होने में 7 से 8 महीने लगेंगे।
निर्णय छात्र हित में, लेकिन संसाधन भी तो दे सरकार
विद्यालय क्रमोन्नत करना छात्र हित में है, लेकिन जो स्कूल पहले क्रमोन्नत हो चुके या पहले से चल रहे हैं, उनमें भौतिक व मानव संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए၊। इस पर विचार करने के बाद ही स्कूल क्रमोन्नत करने चाहिए-शेर सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ

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