संस्कृत शिक्षायाः दयनीया दशा... प्रदेश में 20 नए कॉलेज खोले, 51 कॉलेजों में 57 शिक्षक, कोटा में 450 छात्रों को पढ़ाने वाला कोई नहीं
राज्य सरकार नए कॉलेज खोलकर वाहवाही लूट रही है, लेकिन इनमें पढ़ाने वाले तो हैं ही नहीं। प्रदेशभर मैं संस्कृत शिक्षा कॉलेजों की स्थिति दयनीय है। यहां के 31 संस्कृत कॉलेजों के लिए 57 शिक्षक थे। इस सत्र में 20 नए संस्कृत कॉलेज खोल दिए। कॉलेज 51 हो गए लेकिन शिक्षक 57 ही हैं। हाल ही जारी तबादला सूची में पहले से संचालित कॉलेज से इक्का-दुक्का शिक्षकों को नए खोले कॉलेज में लगा दिया। ऐसे में पहले से संचालित कुछ कॉलेज विहीन शिक्षिक हो गए। जबकि, कुछ कॉलेज में सिर्फ प्राचार्य रह गए। नई भर्ती की फिलहाल कोई संभावना नहीं है। ऐसे में इस सत्र में कॉलेजों का संचालन कैसे इन कॉलेजों का होगा, कहा नहीं जा सकता। बूंदी के कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि अग्रवाल की नियुक्ति की गई है। लेकिन वो अंग्रेजी से हैं
केस 1
बिठ्ठलनाथ संस्कृत कॉलेज
कोटा संभाग का सबसे बड़ा कॉलेज है। 450 स्टूडेंट्स यहां आचार्य और शास्त्री पाठ्यक्रम में पढ़ते हैं। यहां 1 प्राचार्य, 2 शिक्षक थे। बारां व बूंदी में नए कॉलेज खुलने से दोनों को वहां लगा दिया अब प्राचार्य ही यहां रह गए
केस 2
डूंगरपुर जिले में पीठ का
राजकीय संस्कृत कॉलेज करीब दो दशक पुराना है। यहां कुछ साल से शिक्षक ही नहीं है। एक क्लर्क के भरोसे कॉलेज चल रहा है। अभी कई शिक्षकों को इधर से उधर किया गया है। लेकिन इस कॉलेज को शिक्षक नहीं मिला।
केस 3
चेचट के राजकीय संस्कृत कॉलेज में 400 से अधिक स्टूडेंट्स हैं। शास्त्री के लिए सबसे बड़ा कॉलेज है, लेकिन शिक्षक नहीं है। सिर्फ एक प्राचार्य हैं। बरसों से मांग कर रहे हैं, नियुक्ति नहीं है।
प्रदेश के अधिकांश संस्कृत कॉलेज में एक या दो शिक्षक हैं। वहीं, जयपुर के महाराजा संस्कृत कॉलेज में 11 शिक्षक लगे हैं। तबादला सूची में इनमें एक भी प्रभावित नहीं हुआ। बल्कि यहां रह चुके शिक्षक, जिनका कभी कहीं तबादला हो गया था, वे लौट आए हैं। डॉ. अवधेश मिश्रा संस्कृत कॉलेज अजमेर में प्रिंसिपल थे। उन्हें झालावाड़ के पास रटलाई में लगा दिया। चूंकि रटलाई में डॉ. . जितेंद्र अग्रवाल थे। वे भी यहां 27 जून | को महाराजा कॉलेज जयपुर से आए थे, उन्हें वापस वहीं भेज दिया। इसी तरह की स्थिति बूंदी में हुई है।
2005 से भर्ती नहींः डॉ. संजय चावला, रिटायर्ड प्रोफेसर, संस्कृत कॉलेज: सरकार ने नए संस्कृत कॉलेज खोल दिए, लेकिन शिक्षक नहीं है। पहले भर्ती करनी चाहिए थी। साल 2005 से भर्ती नहीं हुई है। अभी प्रदेश के 51 कॉलेज के लिए 53 असिस्टेंट प्रोफेसर, 4 प्रोफेसर और सिर्फ 3 प्राचार्य हैं। जिन मांग कर रहे हैं, लेकिन कॉलेजों में शिक्षक वहां से लगाए जाने चाहिए थे।

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