कौशल दिवस: दावों में उलझी स्किल, 45 फीसदी को ही रोजगार
सीकर. प्रदेश में उच्च शिक्षा की रफ्तार का आंकड़ा भले ही 70 फीसदी को पार कर हो गई है। लेकिन अभी भी प्रदेश के माथे पर बेरोजगारी का दाग है। केन्द्र सरकार ने वर्ष 2015 में देश के 40 करोड़ युवाओं को रोजगार दिलाने के मकसद से कौशल विकास की शुरूआत कर एक नया विजन देश के युवाओं के सामने रखा।लेकिन इसमें भी रोजगार दिलाने की रफ्तार अभी भी महज कागजों में उलझ रही है। प्रदेश में हर साल एक लाख से अधिक युवाओं को आरएसआरएलडीसी की सात योजनाओं के जरिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लेकिन रोजगार महज 37 से 45 फीसदी को ही मिल पा रहा है। लगभग छह साल पहले सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा होने के बाद भी सरकार की ओर से स्किल प्रशिक्षण सेंटरों ने रोडमैप नहीं बदला। वहीं दूसरे राज्यों में भी प्रशिक्षण के बाद प्लेंसमेंट होने की वजह से युवाओं का जुड़ाव इन योजनाओं से कम हो पा रहा है।
यह है यूथ का दर्द...
वर्ष नियोजन
2019 ---6523
2020---- 1170
2021--- 2203
2022--- 1155
सरकार का दावा: 50 से 75 फीसदी नियोजन
केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से सात प्रमुख योजनाओं के जरिए युवाओं की स्किल बढ़ाई जा रही है। इन योजनाओं में 50 से 75 फीसदी प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं के नियोजन की शर्त रहती है। इसके अलावा कई योजनाओं में नियोजन के साथ स्वरोजगार दिलाने का भी लक्ष्य शामिल है।
ऐसे चमकानी थी बेरोजगारों की किस्मत
प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को हुनर के दम पर नौकरी दिलाने के लिए कौशल विकास योजना में 200 से अधिक पाठ्यक्रमों का निशुल्क कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। बेरोजगार ऑनलाइन आवेदन के जरिए इन पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते है। निजी संस्थाओं की ओर से संबंधित ट्रेड में 3-4 महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद डिजिटल प्रमाणपत्र भी जारी किया जाता है। प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को को रोजगार दिलवाने का जिम्मा उसी एजेंसी का है, जिसने प्रशिक्षण दिया है।
केस 1: आठ महीने प्रशिक्षण, बेरोजगार
सीकर निवासी शुभकरण सैनी ने बताया कि उन्होंने दो ट्रेड में आठ महीने का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद प्रशिक्षण देने वाली कंपनी ने अपनी शर्त की पालना के लिए दिल्ली की एक कंपनी में प्लेसमेंट करवा दिया। कंपनी ने छह महीने तक महज आठ रुपए मासिक देने की बात कही। दिल्ली जैसे शहर में रहने का खर्चा ही काफी हो जाता है इसलिए वह जॉब करने नहीं गए।
केस दो: अब तक नहीं मिला रोजगार
सीकर निवासी अनिता कुमारी ने एक ट्रेड में प्रशिक्षण लिया। इसके बाद अनिता को छह हजार रुपए मासिक के जॉब का ऑफर मिला। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर कई जगह जॉब हासिल करने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। इस पर अब डाटा एन्ट्री ऑपरेटर का प्रशिक्षण भी लिया है।
देश में स्कूली और कॉलेज शिक्षा के पाठ्यक्रम का लगातार विस्तार होता रहा है। लेकिन अभी भी दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले स्किल वर्कर की हमारे यहां काफी कमी है। एक्सपर्ट का कहना है कि अब सरकार ने दुनिया के कई देशों से सीख लेते हुए नई शिक्षा नीति में स्कूली पाठ्यक्रमों में रोजगारमुखी पाठ्यक्रमों को शामिल करने का विजन दिखाया है। एक्सटर्प का कहना है कि यदि सरकार की ओर से दुनिया के अलग-अलग देशों में जाने वाले कामगारों की यदि स्किल बढ़ोतरी कर भेजा जाए तो आमदनी में इजाफा भी हो सकता है।
पाठक्रमों को रिव्यू करने की आवश्यकता
स्किल प्रशिक्षण की योजनाएं काफी अच्छी है। लेकिन इसमें युवाओं के नियोजन की रफ्तार काफी धीमी है। इसलिए इन योजनाओं के जरिए बेरोजगारी का ग्राफ कम करने का जो सपना था वह पूरा नहीं हो सका है। केन्द्र व राज्य सरकार को इन योजनाओं को प्रशिक्षण के पार्ट को और मजबूत करने की आश्यकता है। वहीं पाठ्यक्रमों में समय के साथ रिव्यू करने की आश्यकता भी है।-श्रवण थालौड़, एक्सपर्ट, सीकर
सीएजी की रिपोर्ट में भी कई साल पहले खुलासा, इसके बाद भी सरकार ने नहीं बदला रोडमैप एक्सपर्ट का सुझाव: दुनिया के दूसरे देशों की तरह शुरू हो स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो स्किल विजन बेरोजगारों का दर्द: कम पगार पर दूर-दराज प्लेंसमेंट कैसे हासिल करें नौकरी डीडीयू योजना के अनुसार नियोजन

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