एनईपी में पेंच: सबजेक्ट के 9 ग्रुप्स के भंवर जाल में फंसी ‘उच्च शिक्षा’
बांसवाड़ा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने में कॉलेजों तो क्या विश्वविद्यालयों को भी पसीने आ रहे हैं। गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति अनुसार स्टूडेंट्स के सामने सबजेक्ट चयन के नए ग्रुप्स ऑपन तो कर दिए हैं। पर, इसे धरातल पर लागू करना आसान नहीं है। क्योंकि स्टूडेंट्स को सबजेक्ट चयन के ज्यादा विकल्प देने पर टाइम-टेबल ऐसा सेट करना होगा, जिससे दो सबजेक्ट और प्रायोगिक कार्य एक ही समय पर न हो। ऐसा करने के लिए कॉलेजों के सामने टाइम बढ़ाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं रहेगा।
मएनईपी 2020 की मूल संकल्पना मल्टिपल एंटी और मल्टिपल एग्जिट है। विद्यार्थी को विषय चन में पूरी स्वतंत्रता और विद्यार्थी को विषय कौशल और इंटर डिसिप्लिनरी अध्ययन की सुविधा देना है। इसी विचार को ध्यान में रखकर परीक्षा योजना में ग्रुप तय किए गए हैं, जिससे विद्यार्थी अपनी रुचि अनुसार पढ़ाई कर सके। कॉलेजों में व्यवस्था में बदलाव करना होगा। प्रो. मनोज पंडॺा, परीक्षा नियंत्रक जीजीटीयू, बांसवाड़ा
तीन नहीं सबजेक्ट के अब नौ ग्रुप दो प्रायोगिक विषय
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एक विषय का पीरियड एक घंटा का होने और प्रायोगिक कार्य के लिए पीरियड सेट करने के लिए कॉलेज को चल रहे विषय से दो घंटा अधिक अनिवार्यत: खोलना ही पड़ेगा। उदाहरण के लिए गोविन्द गुरु कॉलेज की ही बात करें तो कॉलेज में सभी नौ समूह में विद्यार्थी होने से कम से कम 10-11 घंटे कॉलेज खोलना पड़ेगा। सभी प्रोफेसर्स को टाइम स्लॉट अलोट करना, जिनका नियमानुसार साढ़े पांच घंटा ही रोका जा सकता है। हाल ही के वर्षों में खोले गए कॉलेज के सामने बड़ी चुनैतियां रहेंगी क्योंकि वहां रेगुलर फैकल्टी ही नहीं है। ऐसे मैं वहां एनईपी की पालना अनुसार स्टूडेंट्स को सबजेक्ट चयन में अधिक विकल्प देने से मुश्किल हो सकती है। इधर, विद्यार्थी को तीन के बजाय नौ ग्रुप का ऑप्शन मिल सकेगा। एग्जाम टाइम टेबल को देखते हुए विद्यार्थी को इन नौ ग्रुप से कोई भी तीन विषय का चयन करना होगा। इससे उन्हें अपनी च्वाइस अनुसार विषय पढ़ने के लिए मिलेगा।

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