‘अपने’ ही बना रहे स्वयं पोर्टल से दूरी... संस्थानों का नहीं रुझान
अजमेर. शिक्षा मंत्रालय उच्च शिक्षा को नवाचार के साथ सुलभ बनाने में जुटा है। लेकिन इसके लिए बनाए गए स्वयं पोर्टल को लेकर विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा विभाग संजीदा नजर नहीं आता। पोर्टल पर 40 प्रतिशत से ज्यादा कोर्स उपलब्ध होने के बावजूद विद्यार्थी-शिक्षक पंजीयन न्यून है। वह भी तब जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में विद्यार्थियों को कई कौशल आधारित पाठ्यक्रम भी पढ़ने हैं।
दो साल पूर्व हुआ था लॉन्च
यूजीसी और कॉलेज शिक्षा विभाग ने कॉलेज-विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सुविधार्थ दो वर्ष पूर्व स्वयं पोर्टल लॉन्च किया था। इसमें वीडियो लेक्चर, टेस्ट सीरीज, स्टडी मेटेरियल और ऑनलाइन चर्चा जैसे विकल्प मौजूद हैं। इन्हें शिक्षकों और विद्यार्थियों के अनुरूप विभाजित किया गया है। 32 चैनल में करीब 500 कोर्स संचालित हैं। जिनमें 15 सर्टिफिकेट, 29 डिप्लोमा, 386 अंडर ग्रेजुएट और 279 पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के कोर्स हैं।
शीर्ष संस्थान जुड़े हैं
एआइसीटीई, सीईसी, इग्नू, आइआइएमबी, एनसीईआरटी, एनआइओएस और एनआइ ट्रिपल टी आर स्वयं पोर्टल से जुड़े हैं। इनमें पारंपरिक शिक्षण के अलावा समानांतर ऑनलाइन पद्धति भी है। सेमेस्टर या एक वर्षीय पाठ्यक्रम में 40 प्रतिशत कोर्स की पढ़ाई स्वयं की जा सकती है।
फैक्ट फाइल
27 सरकारी विश्वविद्यालय हैं राज्य में
52 प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं राज्य में
545 से ज्यादा सरकारी कॉलेज
1800 से ज्यादा प्राइवेट कॉलेज
30 लाख से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत
शैक्षिक नवाचार में स्वयं पोर्टल मददगार है। विद्यार्थी और फैकल्टी इसका योजनाबद्ध इस्तेमाल करें तो नई शिक्षा नीति में काफी मदद मिल सकती है। पढ़ाई और सर्टिफिकेट कोर्स को लेकर जागरुकता लाने के लिए प्रयास होने चाहिएं।-प्रो. आलोक चतुर्वेदी, एसपीसी-जीसीए

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