बिना डीपीसी रिक्त पदों को पातेय वेतन पदोन्नति से भरने जा रहा है शिक्षा विभाग
बांसवाड़ा ।शिक्षा विभाग एक बार फिर नियमित पदोन्नति के स्थान पर रिक्त पदों को भरने के लिए तदर्थ पातेय वेतन पदोन्नति का सहारा लेने जा रहा है। बीकानेर स्थित माध्यमिक शिक्षा विभाग राजस्थान के निदेशक गौरव अग्रवाल ने संयुक्त शासन सचिव शिक्षा ग्रुप-2 को पत्र लिखकर तृतीय श्रेणी शिक्षकों की नई भर्ती के लिए पद खाली करने, विभिन्न न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का हवाला देते हुए तृतीय श्रेणी से वरिष्ठ अध्यापक के पद पर तदर्थ पदोन्नति की स्वीकृति एवं मार्गदर्शन मांगा है।उधर, इसी प्रकार से पदोन्नति पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी हुई थी, जिसे पातेय वेतन पदोन्नति का नाम दिया था। इसमें छह माह या नियमित पदोन्नति होने तक या छह माह और बढ़ाए जा सकने वाले कार्यकाल तक यह पदोन्नति की जाती है।
पूर्व में सरकार के एक आदेश से प्रदेश के सभी राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों को न केवल पदोन्नति से वंचित कर दिया, बल्कि वे एक भी पदोन्नति बिना राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। जबकि शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक उन्हें कम से कम दो पदोन्नति मिलनी चाहिए थी।13 साल बाद भी नहीं मिला कोई लाभ : शिक्षा विभाग में 2009-10 में करीब 23 हजार उप्रावि के प्रधानाध्यापकों को पातेय वेतन पर पदोन्नति दी थी। जिन्हें 13 वर्ष बाद भी कोई लाभ नहीं मिला। इन शिक्षकों को तृतीय श्रेणी से वरिष्ठ अध्यापक पद पर पदोन्नति दी थी। जिसमें सभी के पदनाम और स्कूल बदल दिए। प्रदेश में शिक्षा विभाग के लिए 29 एवं 30 मार्च 2011 को गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया।
^राज्य में 2009-10 में पातेय वेतन पर पदोन्नत शिक्षकों को 13 वर्ष बाद भी पदोन्नति का लाभ नहीं मिला और शिक्षा विभाग दुबारा इसी आधार पर तदर्थ पदोन्नति करने जा रहा है। विभाग को 23 हजार शिक्षकों की स्थायी पदोन्नति करनी चाहिए। ऐसा नहीं करने पर संघ की ओर से आंदोलन किया जाएगा। -मोहरसिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान।

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