
चुनावी साल में जातियों के आधार पर बोर्ड बनाए, कागजों तक सिमटे
जयपुर. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल इंजीनियरिंग करते हुए प्रदेश में जातियों के आधार पर कई बोर्डों का गठन किया है। एक-एक बाद 10 से अधिक बोर्ड बनाए गए। जानकारी के अनुसार अलग-अलग जातियों और वर्गों की मांग के आधार पर अभी 5-7 बोर्ड और बनाए जाने हैं।हालांकि ज्यादातर नए बोर्ड कागजों से बाहर ही नहीं निकले हैं। अधिकांश में अध्यक्ष नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में कामकाज भी शुरू नहीं हुआ है।
एक ही विभाग में 18 बोर्ड व आयोग
इन बोर्ड-आयोगों का मूल विभाग एक ही है। इन सभी को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में रखा गया है। एक-एक करके इस विभाग में अब तक कुल 18 बोर्ड व आयोग हो चुके हैं। इतनी अधिक संख्या में बोर्ड-आयोग होने के कारण उनकी फाइलें भी समय पर निकल नहीं पाती। इतना ही नहीं कई बोर्ड व आयोग एक-दो कमरों तक ही सिमटे हुए हैं। स्थिति यह है कि झालाना स्थित सरकारी छात्रावास के पास वाले एक भवन में एक साथ चार बोर्ड-आयोगों के कार्यालय चल रहे हैं। यहां बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राजस्थान राज्य विमुक्त, घुमंतु व अर्द्ध घुमंतु कल्याण बोर्ड, केशकला बोर्ड व राज्य आर्थिक पिछड़ा वर्ग बोर्ड का दफ्तर चल रहा है। ऐसे में भवन पर जगह-जगह अलग-अलग बोर्डों के प्रचार संबंधी बैनर व बोर्ड लगे हुए हैं। आर्थिक पिछड़ा वर्ग बोर्ड में अध्यक्ष नहीं होने के कारण उसका बोर्ड नहीं है।
जाति एवं वर्ग आधारित राज्य के कुछ प्रमुख बोर्ड
महात्मा ज्योतिबा फुले बोर्ड
रजक कल्याण बोर्ड
गाडिया लौहार कल्याण बोर्ड
वीर तेजाजी किसान कल्याण बोर्ड
, स्वर्ण रजत कला विकास बोर्ड
- देवनारायण बोर्ड
. गुरु नानकदेव सिख वेलफेयर बोर्ड
श्री कृष्ण बोर्ड (गठन की घोषणा की जा चुकी)
0 विप्र कल्याण बोर्ड
1 चर्म शिल्प कला विकास बोर्ड
2 महाराणा प्रताप बोर्ड
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