अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूलों में किताबों का इंतजार ,800 से अधिक स्कूलों में उपलब्ध नहीं पाठ्यक पुस्तकें
सीकर निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए प्रदेश सरकार ने अंग्रेजी माध्यम स्कूल तो खोल दिए लेकिन, इनमें न तो पूरा स्टाफ दिया गया है और ना ही किताबों की व्यवस्था की गई है। ऐसे में विद्यार्थी पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम में ढल भी नहीं पा रहे है।हिंदी माध्यम स्कूलों को छोड़कर अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में लॉटरी से प्रवेश लिया। सरकार ने भी बड़ी संख्या में स्कूलों को हिंदी माध्यम से अंग्रेजी माध्यम में बदला। अब स्थिति यह है कि विद्यार्थियों को किताबों का भी इंतजार करना पड़ रहा है। गत दिनों शिक्षा निदेशक ने विभाग की समीक्षा बैठक की।
इसमें भी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में अभी तक पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराने की बात उठी तो निदेशक ने इसे गंभीरता से लिया। बैठक में शिक्षा निदेशक ने प्रदेश के सभी महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम तथा राजकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में किताबों की उपलब्धता तथा वंचित विद्यालयों की सूची मांगी है। इसी माह स्कूलों में प्रथम परख की परीक्षा भी हो चुकी है, लेकिन पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई।
821 स्कूलों में पुस्तकें उपलब्ध ही नहीं
प्रदेश के 821 ऐसे अंग्रेजी माध्यम स्कूल है। जहां पर पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध ही नहीं हो पाई है। जबकि सरकार की मंशा है कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को सभी तरह से मजबूत किया जाए।समीक्षा बैठक में 3225 स्कूलों की सूची रखी गई थी। इसमें से 1704 स्कूलों में ही पाठ्य पुस्तकें पहुंच पाई है। जबकि 821 स्कूलों में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई है।

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