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गुरुवार, 20 अगस्त 2026

UP के सरकारी स्कूलों में YouTubers की Entry बंद! बिना अनुमति फोटो-वीडियो बनाया तो होगी कार्रवाई, जानें क्या है नया आदेश

 



UP के सरकारी स्कूलों में YouTubers की Entry बंद! बिना अनुमति फोटो-वीडियो बनाया तो होगी कार्रवाई, जानें क्या है नया आदेश

UP School News 2026: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। प्रदेश के कई जिलों में परिषदीय विद्यालयों में बाहरी लोगों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के अनधिकृत प्रवेश पर सख्ती शुरू कर दी गई है। बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के स्कूल परिसर में प्रवेश करने, फोटो खींचने या वीडियो बनाने पर रोक लगाई गई है। ताजा आदेश अयोध्या में जारी हुआ है, जबकि आजमगढ़, बलिया, मऊ और बलरामपुर समेत कई जिलों में भी इसी तरह के निर्देश सामने आ चुके हैं। हालांकि अभी इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू एक समान राज्यव्यापी प्रतिबंध कहना सही नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग जिलों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों की ओर से अलग आदेश जारी किए गए हैं।अयोध्या में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लालचंद की ओर से जारी आदेश के अनुसार किसी भी बाहरी व्यक्ति, YouTuber या सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्ति को सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना परिषदीय विद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही बिना अनुमति विद्यालय में फोटो और वीडियो बनाने पर भी रोक लगाई गई है। आदेश में कहा गया है कि कुछ लोग बिना अनुमति स्कूलों में पहुंचकर विद्यालय और कर्मचारियों के फोटो-वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। विभाग के अनुसार इससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षक पद की गरिमा के साथ विभाग की छवि पर भी असर पड़ता है।

आखिर सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा?

सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की आवाजाही को लेकर शिक्षा विभाग की चिंता केवल वीडियो बनाने तक सीमित नहीं है। स्कूलों में छोटे बच्चे पढ़ते हैं और उनकी सुरक्षा तथा निजता सबसे महत्वपूर्ण होती है। किसी व्यक्ति का बिना अनुमति स्कूल परिसर में पहुंचना, बच्चों की रिकॉर्डिंग करना या कक्षा की गतिविधियों को सोशल मीडिया पर डालना कई सवाल खड़े करता है। यही वजह है कि विभाग अब इस तरह की गतिविधियों को अनुमति की व्यवस्था से जोड़ना चाहता है।कानपुर में भी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने परिषदीय स्कूलों में अनधिकृत प्रवेश को लेकर निर्देश जारी किए थे। वहां प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों से कहा गया कि बिना परिचय पत्र आने वाले बाहरी व्यक्ति को स्कूल से बाहर भेजा जाए और उसे विभागीय जानकारी नहीं दी जाए। यदि कोई व्यक्ति परिचय पत्र दिखाता है तो यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि वह विभागीय आदेश के तहत ही स्कूल आया है। साथ ही स्कूल के अभिलेखों की फोटो खींचने की अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए गए।

कई जिलों में पहले ही शुरू हो चुकी है सख्ती

उत्तर प्रदेश में यह मामला अचानक एक जिले तक सीमित नहीं रहा है। हाल के दिनों में कई जिलों से ऐसे आदेश सामने आए हैं। आजमगढ़ में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से बाहरी लोगों और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के स्कूलों में प्रवेश को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। बलिया में भी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में YouTubers तथा सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के अनधिकृत प्रवेश पर रोक की खबर सामने आई। इसके बाद अयोध्या का आदेश भी चर्चा में आया है।मऊ और बलरामपुर समेत कुछ अन्य जिलों में भी बिना अनुमति स्कूल परिसर में पहुंचने और फोटो-वीडियो बनाने पर रोक से जुड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इसका मतलब साफ है कि शिक्षा विभाग अब स्कूलों में आने वाले बाहरी लोगों की गतिविधियों को लेकर पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क हो गया है।

YouTubers के लिए क्या बदलेगा?

अब कोई YouTuber या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वाला व्यक्ति सिर्फ कैमरा लेकर सरकारी स्कूल में पहुंचकर वीडियो नहीं बना सकेगा। उसे पहले संबंधित सक्षम अधिकारी से अनुमति लेनी होगी। अनुमति के बिना स्कूल परिसर में प्रवेश या फोटो-वीडियोग्राफी करने पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।यह नियम केवल YouTubers तक सीमित नहीं है। आदेशों में बाहरी व्यक्ति और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों का भी उल्लेख किया गया है। यानी स्कूल परिसर में आने वाले किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के लिए अनुमति जरूरी होगी। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि स्कूल में कौन आ रहा है, किस काम से आ रहा है और वहां किस तरह की रिकॉर्डिंग की जा रही है।

क्या पत्रकार भी स्कूल में नहीं जा सकेंगे?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध आदेशों का मुख्य जोर अनधिकृत प्रवेश और बिना अनुमति फोटो-वीडियोग्राफी पर है। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी पत्रकार या अधिकृत व्यक्ति के लिए स्कूल में रिपोर्टिंग का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अनुमति लेकर संबंधित अधिकारी के निर्देशों के अनुसार स्कूल में प्रवेश किया जा सकता है।ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों को बाहरी लोगों से पूरी तरह काटना नहीं, बल्कि अनधिकृत गतिविधियों पर नियंत्रण रखना है। खासकर बच्चों की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले उनकी निजता और सुरक्षा को ध्यान में रखना जरूरी है।

लेकिन एक सवाल यह भी है...

सरकारी स्कूलों में अनधिकृत YouTubers की एंट्री रोकने के फैसले को बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के लिहाज से देखा जा सकता है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता का सवाल भी जुड़ा है। सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील, शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की सुविधाओं और पढ़ाई की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें सामने आती रहती हैं। कई बार किसी स्थानीय व्यक्ति का वीडियो ही ऐसी समस्या को सामने लाता है।

बलिया का एक मामला इसी वजह से चर्चा में आया था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बच्चों के मिड-डे मील के दौरान हाथ में रोटी-सब्जी लेकर खाने की तस्वीर सामने आई थी। बाद में विभाग की ओर से जांच की गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार वीडियो 20 अप्रैल 2026 का था और संबंधित विद्यालय में 154 विद्यार्थी नामांकित थे, जबकि उनके लिए 160 थालियां उपलब्ध होने की बात विभागीय जांच में सामने आई। इसलिए असली चुनौती सिर्फ कैमरा रोकना नहीं है। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जिसमें बच्चों की निजता और सुरक्षा भी बनी रहे और सरकारी स्कूलों की व्यवस्था की स्वतंत्र निगरानी भी पूरी तरह खत्म न हो।

स्कूलों में अब अनुमति व्यवस्था पर जोर

नए निर्देशों के बाद प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। उन्हें स्कूल में आने वाले बाहरी लोगों की पहचान और अनुमति की जांच करनी होगी। किसी व्यक्ति के पास अनुमति नहीं है तो उसे स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी या उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा सकती है।इस व्यवस्था से स्कूलों में पढ़ाई के दौरान होने वाली अनावश्यक आवाजाही कम करने की उम्मीद है। साथ ही बच्चों की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर बिना अनुमति साझा किए जाने की घटनाओं पर भी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

आगे क्या होगा?

अभी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जारी आदेशों के आधार पर तस्वीर सामने आ रही है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में क्या इसी तरह के निर्देश पूरे प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों के लिए एक समान रूप से जारी किए जाते हैं या जिला स्तर पर ही नियम लागू रहते हैं। फिलहाल अभिभावकों और छात्रों के लिए संदेश साफ है कि सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की अनधिकृत गतिविधियों पर शिक्षा विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को स्कूल में प्रवेश या फोटो-वीडियो बनाने से पहले अनुमति लेनी होगी। वहीं शिक्षा विभाग के सामने अगली बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की होगी कि बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों की गरिमा के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी बनी रहे।

UP के सरकारी स्कूलों में YouTubers की Entry बंद! बिना अनुमति फोटो-वीडियो बनाया तो होगी कार्रवाई, जानें क्या है नया आदेश Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP BASIC NEWS

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