परिषद‍ीय विद्यालयों की अवकाश तालिका वर्ष 2025 देखें व करें डाउनलोड

👇Primary Ka Master Latest Updates👇

सोमवार, 20 मार्च 2023

देश के 19546 बच्चे कचरे में खोज रहे सपने



 देश के 19546 बच्चे कचरे में खोज रहे सपने

झुंझुनूं. छह साल की साहना, आठ साल की सानिया और ग्यारह साल के मोनित सहित कुछ बच्चे सुबह-सुबह ही कचरे के ढेर पर हाथ मारते दिखे। पूछा तो बताया कि रोज ही ऐसा करते हैं। गरीब होने के कारण यह उनकी मजबूरी है। हालांकि स्कूल जाकर पढऩे की ललक सभी बच्चों में दिखी। सानिया ने कहा कि हम सब पढऩा चाहते हैं लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इस लायक नहीं। कचरे के ढेर में भविष्य तलाशने वाले बच्चों की यह तो एक बानगी भर है। देश में ऐसे 19546 बच्चे हैं जो सड़कों पर जीवन व्यतित करने को मजबूर हैं। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जो दिन-रात सड़क पर ही रहते हैं तो कई ऐसे हैं जो दिन में परिवार के साथ सड़क पर रहते हैं और रात को झुग्गी-झोपडिय़ों में चले जाते हैं।


10, 401 बच्चे बेघर, 882 बेसहारा

हाल ही में संसद में पेश महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 2022 के आंकड़ों के अनुसार देश में 19546 बच्चे सड़क पर रहकर जीवन बिता रहे हैं। इनमें 10 हजार 401 तो ऐसे हैं जिन्हें घर नसीब नहीं। वे अपने परिवार के साथ दिन-रात सड़क पर ही रहते हैं। वहीं, 8263 ऐसे बच्चे हैं जो दिन में सड़कों पर रहते हैं और रात को झुग्गी-झोपडिय़ों में चले जाते हैं। खास बात यह है कि 882 बच्चों का कोई सहारा नहीं है। वह अकेले ही सड़कों पर जिंदगी जी रहे हैं।


राज्य बच्चे


महाराष्ट्र 5153


गुजरात 1990


दिल्ली 1853


तमिलनाडु 1719


मध्यप्रदेश 1491


कर्नाटक 1220


उत्तर प्रदेशें 1038


तेलंगाना 811


आंध्र प्रदेश 787


राज्य बच्चे


हरियाणा 777


असम 322


बिहार 248


जम्मू-कश्मीर 246


ओडिसा 226


पंजाब 226


छत्तीसगढ़ 205


पश्चिम बंगाल 173


हिमाचल प्रदेश 108


महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा

सड़क पर रहने वाले बच्चों की संख्या महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 5153 है। जबकि राजस्थान में ऐसे बच्चों की संख्या 574 हैं। इनमें से 387 ऐसे बच्चे हैं जो दिन-रात सड़क पर ही बिताते हैं। वहीं 175 बच्चे रात को परिवार के साथ झुग्गी-झोपडिय़ों में चले जाते हैं तो 12 ऐसे बच्चे हैं जो बिना किसी के सहारे के दिन-रात सड़कों पर ही रहते हैं।


छह राज्यों में एक भी बच्चा सड़क पर नहीं

देश के 36 राज्यों में 6 राज्य ऐसे भी हैं जहां एक भी बच्चा सड़क पर नहीं है। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, लक्षद्वीप, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम में सड़क पर रहने वाले बच्चों की संख्या शून्य है। वहीं, नागालैंड में एक ही बच्चा सड़क पर रहता जो रात को परिवार के साथ घर चला जाता है।


882 बच्चों का कोई सहारा नहीं, अकेले ही जी रहे जिंदगी

झुंझुनूं. छह साल की साहना, आठ साल की सानिया और ग्यारह साल के मोनित सहित कुछ बच्चे सुबह-सुबह ही कचरे के ढेर पर हाथ मारते दिखे। पूछा तो बताया कि रोज ही ऐसा करते हैं। गरीब होने के कारण यह उनकी मजबूरी है। हालांकि स्कूल जाकर पढऩे की ललक सभी बच्चों में दिखी। सानिया ने कहा कि हम सब पढऩा चाहते हैं लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इस लायक नहीं। कचरे के ढेर में भविष्य तलाशने वाले बच्चों की यह तो एक बानगी भर है। देश में ऐसे 19546 बच्चे हैं जो सड़कों पर जीवन व्यतित करने को मजबूर हैं। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जो दिन-रात सड़क पर ही रहते हैं तो कई ऐसे हैं जो दिन में परिवार के साथ सड़क पर रहते हैं और रात को झुग्गी-झोपडिय़ों में चले जाते हैं।

देश के 19546 बच्चे कचरे में खोज रहे सपने Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP BASIC NEWS

0 Comments:

एक टिप्पणी भेजें