हर तीसरा ग्रेड थर्ड शिक्षक चाहता है तबादला:5 साल से मौका नहीं, 45 हजार शिक्षक गृह जिले से बाहर कर रहे हैं नौकरी
विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में पिछले लम्बे समय से तबादलों का इंतजार कर रहे तृतीय श्रेणी शिक्षक निराश हैं। ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादले पिछले पांच साल से नहीं हुए हैं। वहीं प्रतिबंधित जिलों में कार्यरत शिक्षक पिछले 12 साल से अपने गृह जिले में आने का इंतजार कर रहे हैं। ट्रांसफर पॉलिसी फाइनल नहीं होने के कारण इन शिक्षकों के गृह जिले में आने की आस पूरी नहीं हो पाई है। अब शिक्षकों को चुनाव के अंतिम दौर में तबादलों की आस जगी है।
विभिन्न शिक्षक संगठनों ने तबादलों के लिए सरकार पर दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है। शिक्षक संघ शेखावत ने आंदोलन की रणनीति तय कर ली है। ग्रीष्मकालीन अवकाश में तबादले नहीं होने पर शिक्षक मई में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय का घेराव करेंगे। इसके बाद जयपुर में आंदोलन होगा। शिक्षा विभाग में करीब ढाई लाख तृतीय श्रेणी शिक्षक कार्यरत हैं। जिसमें से 45 हजार शिक्षक अपने गृह जिले से बाहर नौकरी कर रहे हैं। वहीं कुछ दूरस्थ इलाकों में कार्यरत हैं। कार्यरत हर तीसरे शिक्षक को तबादला चाहिए।
ट्रांसफर में सरकार के सामने तीन दुविधाएं
1. ग्रेड थर्ड में जिले की बाध्यता
तृतीय श्रेणी शिक्षकों को जिला स्तर पर नियुक्ति दी जाती है। तबादले के दौरान संबंधित जिले में पद रिक्त होने पर ही अन्य जिले में कार्यरत शिक्षक को गृह जिले में लगाया जा सकता है। थर्ड ग्रेड शिक्षक को पद रिक्त नहीं होने पर दूसरे जिले में नहीं भेजा जा सकता। ऐसी स्थिति में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के वाइस वरसा तबादले भी नहीं हो सकते।
2. इसलिए डरती है सरकार
राज्य के आधे से अधिक जिले शैक्षिक दृष्टि से समृद्ध हैं इन जिलों में पद सीमित हैं। यहां के प्रशिक्षित शिक्षक अन्य जिलों में नियुक्ति पा जाते हैं और फिर अपने गृह जिले में आने की चाहत बनी रहती है। सरकार यदि इनकी मांग पूरी कर दे तो भी सभी तृतीय श्रेणी शिक्षक खुश नहीं हो सकते। क्योंकि शिक्षा के समृद्ध जिलों में दूसरे जिलों से तबादला चाहने वालों की संख्या अधिक है।
3. 85 हजार शिक्षक चाहते हैं स्थानांतरण, 50 हजार पद खाली
शिक्षा विभाग में करीब 85 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षक स्थानांतरण चाहते हैं। दो साल पहले सरकार ने शिक्षकों से तबादलों के ऑनलाइन आवेदन मांगे थे, तब यह संख्या सामने आई। इसमें से 53% यानी 45 हजार शिक्षक गृह जिले से बाहर कार्यरत हैं। लेकिन राज्य के 33 जिलों में वर्तमान में 50 हजार पद ही खाली हैं। ट्रांसफर में किसे प्राथमिकता दें इसकी पॉलिसी अभी फाइनल नहीं हुई है।
...और यह हो सकता है समस्या का समाधान
समानता एवं पारदर्शिता रखने के लिए तबादले को नियुक्तियों से जोड़ा जाना चाहिए। नियुक्ति के समय तृतीय श्रेणी शिक्षक ने प्राथमिकता में पहले जो जिला भरा था उस जिले में यदि अब पद रिक्त है तो उन्हें नियुक्ति की मेरिट के आधार से उन जिलों में तबादले की प्राथमिकता में रखा जाना चाहिए। ट्रांसफर चाहने वाले सभी शिक्षकों से आवेदन लिए जाने चाहिए। निश्चित वर्ष या तारीख को बैरियर बनाकर उससे पहले कार्यरत जिन शिक्षकों के तबादले अभी तक नहीं हुए हैं उन्हें ट्रांसफर में प्राथमिकता दी जा सकती है।
यूं समझें समस्या: नियुक्ति के प्रावधान बदले, ट्रांसफर में चलती है अप्रोच पूरे राज्य में एक ही दिन परीक्षा करवा कर नियुक्ति देने का प्रावधान 2005 से शुरू हुआ। इससे पहले जिलों में डीईओ नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी करते थे। नियुक्ति मेरिट से मिलती थी। उस दौर में भी कम मेरिट वाले अपने गृह जिले से दूर दूसरे जिले में जाकर नियुक्ति पाते थे। ऐसे हजारों शिक्षक आज भी उन जिलों में बैठे हैं। अब ट्रांसफर सिर्फ उन्हीं शिक्षकाें काे मिलता है, जिनकी पहुंच हाेती है।
ट्रांसफर से वंचित रहने का कारण
तृतीय श्रेणी के तबादले बमुश्किल वर्षों बाद किए जाते हैं। तबादले राजनीति के आधार पर होने के कारण पुराने शिक्षक वंचित रह जाते हैं और नए शिक्षक अपने गृह जिले में चले जाते हैं। इनके 2018 के बाद तबादले नहीं हुए।
अब राज्य स्तर पर परीक्षा का नियम
अब पूरे राज्य में एक ही दिन एक समान पेपर से परीक्षा ली जाती है। परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर जिला आवंटित होता है। अधिक अंक वाले अभ्यर्थियों को इच्छित जिला मिलता है, जबकि अन्य को दूसरे जिलों में जाना पड़ता है।

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