जिले के स्कूलों में गड़बड़ाया छात्र शिक्षक अनुपात, औसत 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक, 37% शिक्षकों के पद रिक्त
5 साल में सिर्फ 16% बढ़ा
नई शिक्षक भर्ती समय पर नहीं होने से 28 लाख जनसंख्या वाले बीकानेर जिले के सरकारी स्कूलों में छात्र शिक्षक अनुपात गड़बड़ा गया है। कहीं 28 बच्चों पर एक शिक्षक कार्यरत है तो कहीं 50 बच्चों पर एक। जिले के कुल स्कूलों में नामांकन और शिक्षकों के पदों की बात की जाए तो वर्तमान में औसत 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक कार्यरत है। जिले के 2112 स्कूलों में शिक्षकों के 37 फीसदी पद रिक्त चल रहे हैं। सरकारी स्कूलों के नामांकन में पिछले पांच सालों में सिर्फ 16 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 2018 में जिले के स्कूलों में 266637 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। साल 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 309097 पर पहुंचा है। पिछले पांच सालों में पहली से 12वीं क्लास में 42460 बच्चों के नामांकन में बढ़ोतरी हुई है। वही 48 स्कूल नए खुले हैं। 122 पीएस स्कूलों को यूपीएस में क्रमोन्नत किया गया है। वर्तमान में जिले के स्कूलों में 13919 शिक्षकों के पद स्वीकृत है। जिसमें से 5078 रिक्त चल रहे हैं।
4 साल में 131 सरकारी अंग्रेजी स्कूल शुरू, ट्रेंड टीचर का इंतजार
4 साल में बीकानेर में 131 हिंदी मीडियम स्कूलों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में रूपांतरित किया गया है। स्कूलों में करीब 23 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। लेकिन अभी तक इन स्कूलों को अंग्रेजी में ट्रेंड शिक्षक नहीं मिले हैं। करीब 10 हजार पदों पर होने वाली संविदा भर्ती के जरिए जिले के इंग्लिश मीडियम स्कूलों को अंग्रेजी में ट्रेन शिक्षक मिलेंगे। 53 सरकारी स्कूल किराए के भवन में, पर्याप्त सुविधाएं नहीं जिले में शिक्षकों के पदों की स्थिति 13919 स्वीकृत 8841 कार्यरत 5078 खाली 30 स्कूलों में बिजली नहीं 47 स्कूलों में शौचालय नहीं 4879 विद्यार्थी हुए ड्रॉपआउट पिछले सेशन में आरपीएससी और कर्मचारी चयन आयोग की ओर से व्याख्याता सेकंड ग्रेड और तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की जा चुकी है। नई भर्ती होने के बाद शिक्षकों के सभी पद भर जाएंगे। -सुरेंद्र सिंह भाटी, डीईओ, माध्यमिक क्षतिग्रस्त बिल्डिंग, टूटा फर्श और दीवारों में दरारें।
ये हालत किराए के भवनों में चल रहे सरकारी स्कूलों की है। जिले में करीब 53 स्कूल किराए के भवन में चल रहे हैं। इन स्कूलों में आरटीई नियमों के मुताबिक विद्यार्थियों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इन 53 स्कूलों में ना तो प्लेग्राउंड है ना ही कंप्यूटर लाइब्रेरी। इन स्कूलों को सरकारी भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण मजबूरन किराए की बिल्डिंग में चलाना पड़ रहा है।

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