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सोमवार, 8 मई 2023

शिक्षा विभागः व्याख्याताओं की डीपीसी के बाद काउंसलिंग नहीं होने व तीन सत्रों से वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता पदोन्नति नहीं होने से से गड़बड़ाई शिक्षण


 शिक्षा विभागः  व्याख्याताओं की डीपीसी के बाद काउंसलिंग नहीं होने व तीन सत्रों से वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता पदोन्नति नहीं होने से से गड़बड़ाई शिक्षण

बाड़मेर । राज्य के सबसे बड़ विभागशिक्षा विभाग की लापरवाही से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विचित्र हालात बनने के साथ ही एक मई से शुरू हुए प्रथम प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में नामांकन पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। शिक्षा विभाग ने लगभग दस हजार व्याख्याताओं को उप प्राचार्य व 500 व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नत करने के साथ ही 1941 उप प्राचार्य को प्राचार्य पद पर पदोन्नत करने के बाद मौजूदा स्कूल में ही पद स्थापित कर रखा है। ऐसे में एक तरफ करीब पांच हजार सरकारी स्कूलों में दो- दो प्राचार्य व 15 उप प्राचार्य तक हो गए हैं। वहीं वर्तमान में सरकारी स्कूलों में चल रहे प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के बीच भी रिक्त पदों वाले स्कूलों को उनकी सेवा नहीं मिलने पर उनके नामांकन पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।  


ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा विभाग में कितनी अंधेरगर्दी है। राज्य में सैकड़ों स्कूल तो ऐसे है जिनमे आहरण वितरण अधिकारीयो का अतरिक्त चार्ज दूसरी स्कूलों के पास है जिससे अनेक कार्य बाधित हो रहा है लेकिन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। दूसरी ओर वर्तमान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों से शहर की स्कूलों में अफर तबादले किए जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारी स्कूलों में बिना शिक्षको के विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षाएं दी है। लेकिन सरकार व विभाग को इनकी कोई चिंता नहीं है।


साढ़े दस हजार से ज्यादा की हुई पदोन्नतिः हाल में शिक्षा विभाग ने साढ़े दस हजार से ज्यादा व्याख्याताओं को प्राचार्य व उपप्राचार्य पद पर पदोन्नति की है। इनमें 1941 उप प्राचार्य को प्राचार्य तथा 9,998 व्याख्याताओं को उप प्राचार्य पद पर पदोन्नत किया गया है। इनके अलावा 2021-22 में भी व्याख्याता से पदोन्नत हुए 500 प्राचार्य कोर्ट में विचाराधीन होने पर अभी पदस्थापन से वंचित है। पदोन्नति के बाद भी मौजूदा स्कूल में ही रहने पर स्कूलों की व्यवस्थाएं नहीं बैठ पा रही।


पदोन्नति के तुरंत बाद करना था पदस्थापन : सरकारी स्कूलों में एक से ज्यादा प्राचार्य व उप प्राचार्य के हालात शिक्षा विभाग की लापरवाही से ही हुए हैं। विभाग को पदोन्नति के साथ ही खाली पदों वाले स्कूल में पद स्थापित करना चाहिए था। ताकि इस तरह की अव्यवस्था का आलम नहीं होता। लेकिन इनको वर्तमान स्कूलों में लगाया हुआ है जिससे बिना काम के ही राज्य सरकार करोड़ों रुपए का वेतन दे रही है। सरकारी स्कूलों में परीक्षा परिणाम जारी होने के साथ ही प्रवेशोत्सव भी शुरू हो गया है, जिसका पहला चरण 16 मई तक है।


इनका कहना है

राज्य सरकार ने अगस्त 2022 में उप प्राचार्य के पद स्वीकृत कर दिए थे। विभाग को उसी वक्त आधे पद सीधी भर्ती व आधे पद पदोन्नति करके भरना चाहिए था। वर्तमान में तीन सत्रों की वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता की पदोन्नति नहीं होने से सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था चरमरा गई है। साथ ही व्याख्याता पद से हुई पदोन्नति के तुरंत बाद पदस्थापन नहीं करने से सरकारी स्कूलों में एक से ज्यादा प्राचार्य व उप प्राचार्य के होने से सरकरी स्कूलों में अजीब हालात हो गए है । सरकार है बिना कार्य के करोड़ों का वेतन दे रही है, इसलिए प्राचार्य, उप प्राचार्य का स्कूलों में जल्द पदस्थापन किया जाएं व तीन सत्रों की बकाया वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता पदोन्नति जल्द करवाई जाएं।-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान ।


7 हजार 883 स्कूलों को दरकार है प्राचार्य की

एक तरफ जहां एक ही स्कूल में कई प्राचार्य व उप प्राचार्य का जमावड़ा है, दूसरी और प्रदेश के 17 हजार 883 स्कूल बिना प्राचार्य व उप प्राचार्य के चल रहे हैं। इनमें 7 हजार 383 स्कूलों को प्राचार्य तथा करीब 10 हजार 500 स्कूलों को उप प्राचार्य का इंतजार है। पांच हजार स्कूलों में दो से ज्यादा प्राचार्य व उप उपप्राचार्य बिना काम के करोड़ों का ले रहे वेतन, पदोन्नति के बाद काउंसलिंग नहीं होने पर प्रदेश की करीब पांच हजार उच्च माध्यमिक स्कूलों में दो से ज्यादा प्राचार्य व उप प्राचार्य नियुक्त है। इनमें करीब 1500 स्कूलों में दो दो प्राचार्य, जबकि करीब साढ़े तीन हज़ार स्कूलों में दो या इससे ज्यादा उप प्राचार्य शामिल है।वर्तमान में इनकी जिस पद पर पदोन्नति हुई उसका काम नहीं कर रहे है जबकि वेतन उस पद का मिल रहा है जिससे राज्य सरकार को बिना कामों के करोड़ों का वेतन देना पड़ रहा है।




शिक्षा विभागः व्याख्याताओं की डीपीसी के बाद काउंसलिंग नहीं होने व तीन सत्रों से वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता पदोन्नति नहीं होने से से गड़बड़ाई शिक्षण Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP BASIC NEWS

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