दूसरी कक्षा के बच्चों के बैग का वजन 4.80 किलो, तीसरी व चौथी के बच्चे 6 किलो से ज्यादा का बस्ता ले जा रहे स्कूल
बांसवाड़ा निजी स्कूलों की फीस भरते-भरते पिता की कमर और पढ़ते-पढ़ते बच्चों के कंधे झुक रहे हैं। स्कूली बैग का बोझ इतना है कि उसे टांगने भर से बच्चे थक जाते हैं, लेकिन निजी स्कूलों ने बच्चों के बैग के वजन में कोई कमी नहीं की। बैग के वजन को लेकर नियम कायदे तो बहुत है, लेकिन अमल में नहीं लिया जा रहा है।नौनिहालों के कंधों पर निजी स्कूलों में पहली कक्षा से ही स्कूल बैग का ऐसा बोझ डाल दिया जाता है कि वह 12वीं कक्षा तक भी उससे निजात नहीं पा सकता। पहली से दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे भी 4 से 5 किलो का बोझ रोज उठा रहे हैं। जहां सरकारी स्कूलों में नो बैग डे मना रहे हैं तो निजी स्कूलों के बच्चे बैग के भारी वजन ढोने को मजबूर हैं। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि सरकार की गाइडलाइन के अनुसार दूसरी कक्षा में जहां 2.5 किलो तक का वजन बैग का होना चाहिए, जबकि 4 किलो 80 ग्राम तक मिला।
वहीं तीसरी कक्षा की बच्ची के स्कूल बैग का वजन 6 किलो 360 ग्राम तक मिला। यहां तक कि चौथी क्लास के बच्चे के बैग का वजन 7 किलो 165 ग्राम तक मिला है। { पहली से दूसरी कक्षा : स्कूल बैग का वजन 1.6 से 2.2 किलो { तीसरी से 5वीं कक्षा : स्कूल बैग का वजन 1.7 से 2.5 किलो { 6वीं से 7वीं कक्षा : स्कूल बैग का वजन 2 से 3 किलो { 8वीं कक्षा : 2.5 से 4 किलो { 9वीं से 10वीं कक्षा : 2.5 किलो से 4.5 किलो { 11वीं से 12वीं कक्षा : स्कूल बैग का वजन 3.5 से 5 किलो तक हो सकता है। कक्षा तय वजन तौलने पर मिला बच्चे और बैग का कुल वजन 2 1.6 से 2.2 4 किलो 80 ग्राम 24 किलो 60 ग्राम 2 1.6 से 2.2 4 किलो 30 ग्राम 25 किलो 3 1.7 से 2.5 6 किलो 360 ग्राम 30 किलो 845 ग्राम 4 1.7 से 2.5 7 किलो 165 ग्राम 33 किलो 245 ग्राम 4 1.7 से 2.5 5 किलो 210 ग्राम 26 किलो 5 1.7 से 2.5 4 किलो 10 ग्राम 46 किलो 170 ग्राम इधर, नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूल बैग वेट पॉलिसी भी तैयार की गई है। इसके तहत स्कूल बैग का वजन पहली से 10वीं कक्षा के छात्रों के शरीर के वजन का 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।
प्री प्राइमरी और प्राइमरी क्लास : नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी के अनुसार 10 से 16 किलोग्राम वजन वाले जो बच्चे प्री प्राइमरी क्लासेस में पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अपने साथ स्कूल बैग ले जाने की जरूरत नहीं है। ^हमने सभी स्कूलों को इस बारे में निर्देश दे रखे हैं। सभी को पालना करनी चाहिए। अगर कोई भी निजी स्कूल पालना नहीं कर रहा है तो नोटिस देंगे और कार्रवाई भी करेंगे। -मावजी खाट, जिला शिक्षा अधिकारी सरकारी स्कूलों की बात की जाए तो राज्य सरकार ने सप्ताह में एक दिन बच्चों को बैग के बोझ से निजात दिलाने के लिए नो स्कूल बैग डे की शुरुआत साल 2022 से की है। हालांकि यहां भी अधिकांश स्कूलों में इसकी पालना नहीं होती है। शनिवार को बैग नहीं ले जाते हैं, उन्हें स्कूल में ही कई तरह की अलग-अलग गतिविधियां कराई जाती हैं। इससे उनका बौद्धिक, शारीरिक विकास होता है। साथ ही सह शैक्षणिक गतिविधियों के प्रति भी विद्यार्थियों की रुचि बढ़ती है। सीबीएसई व केंद्रीय विद्यालयों ने भी नियमों की पालना नहीं करना वालों पर कार्रवाई तक नहीं होती।नोटिस देंगे, कार्रवाई करेंगे : डीईओ
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