अजीब शिक्षा नीति; 5 साल से कम उम्र के बच्चों को यूकेजी में दे रहे एडमिशन, प्रदेश के 23 हजार स्कूलों में क्लास ही नहीं
प्रदेश में बिना तैयारी के जल्दबाजी में नई शिक्षा नीति लागू करने से नौनिहालों का भविष्य दांव पर है। प्रदेश में 31 मार्च तक पांच साल से कम आयु के बच्चों को बाल वाटिका की यूकेजी में प्रवेश दिया जा रहा है। लेकिन प्रदेश की 25 हजार प्राथमिक स्कूलों में से 23910 में अभी तक बाल वाटिका शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में यूकेजी में प्रवेश लेने वाले बच्चों को भी पहली क्लास में ही पढ़ाई करनी पड़ रही है। क्योंकि इस बार एडमिशन की प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल पर करवाई जा रही है।
पोर्टल पर 31 मार्च 2023 तक पांच साल की आयु पूरी करने वाले बच्चों को ही फर्स्ट क्लास में प्रवेश मिल पा रहा है। पांच साल से कम आयु के बच्चों को पोर्टल पर में बाल वाटिका की नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी प्रवेश मिल रहा है। लेकिन स्कूलों में बाल वाटिका की व्यवस्था नहीं हो पाई है। जबकि पूर्व में ऑफ लाइन प्रक्रिया होने से पूरे साल पांच वर्ष की आयु पर बच्चों को पहली क्लास में एडमिशन मिल रहा था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 5 साल से कम आयु के बच्चों को बाल वाटिका में प्रवेश देने की सिफारिश की गई है।
ताकि बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जा सके। इसके लिए प्रदेश में बाल वाटिका की तर्ज पर आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूलों में शिफ्ट किया जाना है। लेकिन अभी महज 1090 स्कूलों में ही आंगनबाड़ी केंद्र स्कूलों में शुरू हो पाए हैं। चूंकि 15 अगस्त तक प्रवेशोत्सव मनाया जा रहा है। ऐसे में ऑनलाइन एडमिशन के कारण मार्च से अगस्त तक पांच साल पूरी करने वाले बच्चों को नर्सरी क्लास में प्रवेश लेना होगा। इससे बच्चे एक साल पिछड़ रहे हैं। यह नियम राजस्थान के अलावा दिल्ली, आंध्रप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, कर्नाटक, गोवा, झारखंड और केरल में भी लागू किया गया है।
अव्यवस्था : यूकेजी में एडमिशन, पढ़ेंगे पहली क्लास, अगले साल वापस उसी कक्षा की पढ़ाई
पहली क्लास में एडमिशन नहीं होने के कारण संस्था प्रधान पांच साल से छोटे बच्चों का यूकेजी में एडमिशन कर रहे हैं। क्योंकि पोर्टल पर नर्सरी, एलकेजी व यूकेजी का ऑप्शन मिल रहा है। स्कूलों में बाल वाटिका की सुविधा नहीं हैं। ऐसे में यूकेजी में एडमिशन लेने के बावजूद बच्चों को पहली क्लास में पढ़ाई करनी पड़ रही है। रिकॉर्ड के मुताबिक स्टूडेंट अगले साल पहली क्लास में आएगा। ऐसे में बच्चे को दोबारा से पहली क्लास की किताबें ही पढ़नी होगी। अभिभावकों का कहना है कि नई शिक्षा नीति की वजह से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। बच्चे ने निजी स्कूल में यूकेजी की पढ़ाई पूरी कर ली है। उसमें सालभर यूनिफॉर्म, किताबें, फीस सहित अन्य खर्च करना पड़ा। अब सरकारी स्कूल में प्रवेश लेने पर बच्चा फिर उसी क्लास में पढ़ेगा। इससे समय और पैसे दोनों बर्बाद होंगे।
इन राज्यों में पांच साल से कम उम्र में मिल रहा है। प्रवेश: विभागीय अधिकारियों के अनुसार देश के 14 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों 5 साल की उम्र से पहले भी बच्चों को फर्स्ट क्लास में एडमिशन मिल रहा है। इनमें केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा गुजरात, तेलंगाना, लद्दाख, असम आदि शामिल है।
पहली कक्षा में प्रवेश पांच वर्ष की आयु पूर्ण करने पर होता है, 31 मार्च को आधार तिथि रखने से कई बच्चों को एक वर्ष का नुकसान होगा। पोर्टल पर नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी का ऑप्शन नई शिक्षा नीति 2020 के आधार पर आंगनबाड़ी के समन्वित फाउन्डेशन स्टेज की थीम पर किया गया है। विभाग को 31 मार्च की तिथि में बदलाव करना चाहिए। उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)
यूं पिछड़ रहे हैं नौनिहाल
खेड़ी निवासी विद्याधर ने बताया, उनकी बेटी अमीषा का जन्म 28 जुलाई 2018 को हुआ था, जो अब 5 साल की होगी। लेकिन स्कूल 31 मार्च तक पांच साल की होने पर प्रवेश दे रहा है।
2. खड़ी बड़ी निवासी अमित कुमार ने बताया, बेटे सुमित का प्रवेश कराने जब स्कूल गए तो संस्था प्रधान ने मना कर दिया। कहा कि 31 मार्च तक पांच साल होना जरूरी हैं। बेटे की जन्मतिथि 2 मई 2018 है।
3. खेड़ी के कैलाशचंद्र ने बताया कि उनका बेटा आर्यन 28 जुलाई को 5 साल का होगा। लेकिन, स्कूल 31 मार्च तक 5 साल का नहीं होने पर प्रवेश नहीं दे रहा।
आपके माध्यम से ही यह जानकारी मिली है। शिक्षा नीति केंद्र स्तर से तय की गई है। 31 मार्च की तारीख को लेकर परेशानी हो रही है तो इसका रिव्यू करवाया जाएगा। बच्चों के भविष्य को लेकर जरूरी संशोधन पर चर्चा की जाएगी। बीडी कल्ला, शिक्षा मंत्री राजस्थान सरकार

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