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गुरुवार, 20 जुलाई 2023

स्टाफ का टोटा : विज्ञान संकाय में पढ़ाने वाले नहीं, शिक्षक नहीं लगाने पर ग्रामीण करेंगे विरोध,500 विद्यार्थियों की शिक्षा पर संकट : 29 में से 20 पद रिक्त


 स्टाफ का टोटा : विज्ञान संकाय में पढ़ाने वाले नहीं, शिक्षक नहीं लगाने पर ग्रामीण करेंगे विरोध,500 विद्यार्थियों की शिक्षा पर संकट : 29 में से 20 पद रिक्त

जवाजा. ग्रामीण क्षेत्र में स्थित सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की शिक्षा पर संकट छाया हुआ है। नवीन शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया। स्कूलों में विद्यार्थियों की तो भरमार है, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई का सपना पूरा नहीं हो पा रहा। मामला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बराखन का है। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या 500 पार है। इसके लिए 29 का स्टाफ स्वीकृत है, लेकिन कार्यरत है मात्र नौ जने। लेकिन विगत लंबे समय से स्टाफ की कमी पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित है। एक ही कक्षा में दो से अधिक कक्षाओं को पढ़ाना अब मजबूरी बन गया है। अपने बच्चों के भविष्य की चिंता को लेकर अब ग्रामीणों का सब्र भी टूटने लगा है। ग्रामीणों ने विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।


विज्ञान संकाय के हालात बदतर

बजट घोषणाओं के तहत ब्यावर ग्रामीण क्षेत्र में कई जगह विज्ञान संकाय तो शुरू कर दिया गया, लेकिन स्टाफ के नाम पर कोई स्वीकृति नहीं हो पाई। ऐसे में विज्ञान संकाय लेने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं हो पा रही। शहरों में तो ट्यूशन व अन्य कोचिंग सुविधाएं मिल जाती है, लेकिन गांवों में ऐसे साधन नहीं होने से विद्यार्थियों के लिए संकट खड़ा हो गया।


गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझे शिक्षक

पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रही स्कूलों में गैर-शैक्षणिक कार्यों की जिम्मेदारी भी यही स्टाफ संभालने को मजबूर है। मिड-डे-मिल, बीएलओ समेत अन्य सरकारी योजनाओं की जिम्मेदारी शिक्षकों को संभालनी पड़ रही है। ऐसे में पढ़ाई का कार्य प्रभावित होना तय है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द ही स्टाफ लगाकर स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था सुचारू की जाए।


इनका कहना है...

विज्ञान और कला विषय में अध्यापक नहीं है। बोर्ड विद्यार्थियों की ज्यादा चिंता है। 500 से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ रहे है, इसी महीने स्टाफ लगाकर शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।-सीमा चौहान, सरपंच, बराखन


स्कूल में स्टॉफ कम है। आज भी कक्षा छह व सात को एक साथ बैठाना पड़ा। पीईईओ स्कूल होने से गैर-शैक्षणिक कार्यों का भी दबाव है। बोर्ड कक्षाओं में जल्द ही व्याख्याताओं की नियुक्ति की जरूरत है।-बल्लाराम, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, बराखन


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