माध्यमिक शिक्षा में तीन साल से विभागीय पदोन्नति बकाया, 5000 विद्यालयों में व्याख्याता पदों की वित्तीय स्वीकृति का इंतजार,
अजमेर. प्रदेशभर में करीब पांच हजार विद्यालयों में व्याख्याताओं के पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं हुई है। ऐसे में विद्यालयों में व्याख्याताओं के पद खाली पड़े हैं। शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के साथ ही विद्यालयों में व्याख्याताओं की मांग को लेकर तालाबंदी एवं प्रदर्शन जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही हैं।शिक्षा विभाग (माध्यमिक) में पिछले तीन साल से विभागीय पदोन्नति (डीपीसी) बकाया चल रही है। वरिष्ठ अध्यापकों के पदोन्नत होने पर विभाग को व्याख्याता मिल सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसे हरी झंडी नहीं मिल पाई है। उधर, राज्य सरकार ने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों को क्रमोन्नत कर उच्च माध्यमिक में तब्दील कर दिया, लेकिन विषयवार व्याख्याताओं की कमी के चलते छात्र-छात्राओं का शिक्षण कार्य प्रभवित हो रहा है।
महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम में अलग से नहीं कैडर
महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम विद्यालय भी हिन्दी माध्यम विद्यालयों की पद रिक्तता का ग्राफ बढ़ा रहे हैं। आंग्रेजी माध्यम के लिए न तो अलग से कैडर बना न ही संविदा भर्ती से पात्र शिक्षक मिल रहे हैं।
ऐसे समझें पदों का गणित
राउप्रावि से राउमावि में क्रमोन्नत विद्यालयों में प्रति विद्यालय 6 वरिष्ठ अध्यापकों के पद होने चाहिए। कुल 1152 विद्यालयों में प्रति विद्यालय 6 वरिष्ठ अध्यापक के अनुसार 6912 पद की जरूरत है।रामावि व राउप्रावि से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्रमोन्नत विद्यालयों में प्रति विद्यालय 3 व्याख्याता पद स्वीकृत होने हैं। ऐसे में 4986 विद्यालयों में प्रति विद्यालय 3 के अनुसार कुल 14958 व्याख्याताओं की जरूरत है।
इनका कहना है...
पद स्वीकृति नहीं होने एवं विभागीय पदोन्नति नहीं होने के कारण व्याख्याताओं की कमी हो गई है। महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम विद्यालय में अलग से कैडर नहीं है। सरकार को डीपीसी जल्द करवानी चाहिए।-बसन्त कुमार ज्याणी, प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा
क्रमोन्नत विद्यालयों की स्थिति
स्तर संख्या
राप्रावि से राउप्रावि 694
राउप्रावि से राउमावि 1152
रामावि से राउमावि 3834
कुल क्रमोन्नत स्कूल 5680

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