
पढ़ाई से पहले अभिभावकों से फीस की गारंटी के ले रहे स्टाम्प
अलवर राज्य सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तमाम प्रयास कर रही है लेकिन यहां राइट टू एजुकेशन (आरटीई) का समुचित लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। जुलाई आधा बीत गया।अभिभावक बच्चों की पढ़ाई को लेकर परेशान हैं। फीस के लिए वह स्टांप देकर गारंटी लेने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग के अफसर भी आराम फरमा रहे हैं। उन्हें सरकार की प्राथमिकताओं से कोई सरोकार नहीं है।
ऐसे समझें फीस और स्टांप का मामला: राज्य सरकार की ओर से प्राइवेट स्कूलों में गरीब व असहाय बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश दिए जाते हैं।निजी स्कूल अभिभावकों से स्कूल फीस के लिए स्टांप पर लिखित ले रहे हैं ताकि अभिभावक ही फीस भर सकें।
बताया जा रहा है सरकार की ओर से कई बार आरटीई के तहत प्रवेश लिए बच्चों की फीस स्कूलों तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में स्कूल अभिभावकों पर दबाव बना सकेंगे। स्टांप पेपर पर फीस देने की तिथि भी लिखवाई गई है। अन्य बच्चों की पढ़ाई स्कूलों में चल रही है लेकिन ये गरीब बच्चे अभी स्टांप के चक्कर में ही लगे हैं। शिक्षा विभाग के अफसरों को पूरी खबर है लेकिन वह कार्रवाई नहीं कररहे हैं।
मामले की जांच कराएंगे
निजी स्कूल फीस के लिए यदि स्टांप ले रहे हैं तो इन मामलों की जांच कराएंगे और फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी। भूपसिंह नरुका, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी
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