खतरे के साये में पढ़ाई कर रहे नौनिहाल, स्कूल भवन क्षतिग्रस्त
आनन्दपुरी. जल संसाधन मंत्री महेंद्रजीतसिंह मालवीया के गृह विधानसभा क्षेत्र आनंदपुरी उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत छाजा के गांव भोजेला में विद्यालय जर्जर हालत में है। 24 परिवारों वाले इस गांव में एकमात्र विद्यालय है।ग्रामीण नानजी पगी, केशव पगी, सुरेश पगी, नाथू, केसर देवी, विमला देवी आदि ने बताया कि 1999 में विद्यालय की स्थापना हुई थी। 12 जनवरी 2001 को विद्यालय बनकर तैयार हो गया था। तत्कालीन जिला प्रमुख महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने इसका उद्घाटन किया था। उसके बाद से आज तक विद्यालय विकास के नाम पर कोई बजट नहीं मिला है। 21 सितंबर 2018 में तेज बारिश के दौरान विद्यालय के कमरे के आगे का बरामदा धराशायी हो गया। बरामदा शाम के समय गिरने से बड़ा हादसा नहीं हुआ, जबकि भवन जर्जर होने की सूचना अधिकारियों को दी थी, किंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया। कई वर्षों से विद्यालय के कमरे जर्जर हालत में होने के बावजूद किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया है।
उल्लेखनीय है कि इसी वार्ड पांच में प्रधान हरिशंकर देवतरा और सरपंच गीता देवी रहते हैं। विद्यालय में 24 का नामांकन है। यहां चार कमरे व एक शौचालय है। एक कमरा प्रधानाध्यापक कार्यालय व दूसरा पोषाहार किचन के लिए उपयोग में ले रहे हैं। दो कक्षाकक्ष जर्जर हालत में हैं। बारिश में पानी टपकता है। बरामदा भी गिरने से विद्यार्थी पोषाहार कक्ष में बैठते हैं। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान जर्जर कमरों की जानकारी देने पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया है। जर्जर भवन होने से बारिश के समय अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भी नहीं भेजते हैं
यहां कक्षाकक्षों की कमी
तलवाड़ा. राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय तलवाड़ा में कक्षाकक्षों की कमी खल रही है। इससे विद्यार्थियों की बैठक व्यवस्था भी सही नहीं हो पा रही है। यहां बना हॉल जर्जर हो रहा है। कार्यवाहक प्रधानाचार्य दीपेश पंडया ने बताया कि गत सत्र में करीब 1200 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। इस बार नया विषय वाणिज्य खुला है। ऐसे में विद्यार्थियों की संख्या अधिक हो सकती है। विद्यालय में कक्षा कक्ष छोटे हैं। जिसमें छात्र-छात्राओं की बैठक व्यवस्था सही नहीं हो पाती है। इसके अतिरिक्त यहां शिक्षकों की भी कमी है।
बांसवाड़ा. जनजाति बहुल जिले में शैक्षिक उन्नयन के लिए संसाधन मुहैया कराने और भवनों के निर्माण पर करोड़ों रुपए व्यय करने के सरकार लाख दावे कर लें, किंतु विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूल भवनों के हाल दयनीय हैं। बरसात के इस मौसम में बारिश के समय कमरों में पानी टपकता है तो कहीं कमरों की कमी के कारण बच्चों को बरामदों में बिठाकर अध्ययन कराने की मजबूरी बनी हुई है। ऐसे हालात पर पत्रिका टीम की पड़ताल की ग्राउंड रिपोर्ट।

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