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बुधवार, 12 जुलाई 2023

स्कूल में प्रवेशोत्सव, शिक्षक देखेंगे ओलंपिक व युवा महोत्सव




 स्कूल में प्रवेशोत्सव, शिक्षक देखेंगे ओलंपिक व युवा महोत्सव

सीकर. सरकार की दोहरी नीति सरकारी स्कूलों पर भारी पड़ रही है। एक तरफ सरकार ने सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त तक प्रवेशोत्सव घोषित कर रखा है। दूसरी ओर करीब 65% से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षण, ग्रामीण ओलंपिक खेलों व युवा महोत्सव सरीखे कामों में उलझाने की कवायद कर ली है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में नामांकन गिरने की आशंका के साथ शिक्षकों का आक्रोश उबाल खाने लगा है। शिक्षकों ने इसे निजी स्कूलों को लाभ देने का सरकारी षडय़ंत्र भी करार दे दिया है।


3.70 लाख में से 2.50 लाख शिक्षक प्रभावित

प्रदेश में 3.70 लाख शिक्षक कार्यरत है। इनमें से नई शिक्षा नीति के तहत 1.72 लाख शिक्षकों के लिए 12 अगस्त तक अलग- अलग चरण प्रशिक्षण कार्यक्रम तय किया गया है। इसके अलावा युवा महोत्सव व 5 अगस्त से प्रस्तावित ग्रामीण ओलंपिक की जिम्मेदारी भी शिक्षा विभाग को दे दी गई है। ऐसे में प्रदेश के करीब 40 हजार से ज्यादा शिक्षक इनसे भी प्रभावित होना तय है। जबकि 40 हजार शिक्षक पहले से बीएलओ, सरकारी विभागों में प्रतिनियुक्ति व ऑनलाइन सरीखे कामों में पहले से जुटे हैं। लिहाजा करीब ढाई लाख शिक्षक प्रवेशोत्सव के बीच प्रभावित होंगे।


पंचायत का काम, शिक्षा विभाग के माथे मढ़ा

इनमें युवा महोत्सव व ग्रामीण ओलंपिक पंचायती राज विभाग का कार्यक्रम है। पर इसे भी प्रवेशोत्सव के बीच शिक्षा विभाग के माथे मढ़ा गया है। जबकि माध्यमिक शिक्षा विभाग पंचायती राज के अधीन नहीं है और प्रांरभिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को गैर शैक्षिक कार्यो में लगाना आरटीई एक्ट का उलंघन है। सरकार के प्रचार से जुड़े कार्यक्रम में शिक्षकों को लगाने की कवायद भी सवालों में है।


प्रतिनियुक्ति भी पड़ रही भारी

सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति भी प्रवेशोत्सव को प्रभावित कर रही है। प्रदेश में करीब दस हजार शिक्षक लंबे समय से शिक्षा निदेशालय , शिक्षा संकुल , जिला व ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों, समसा, कलक्ट्रेट, एसडीएम कार्यालय, तहसील, आपदा प्रबंधन व कंट्रोल रूम सरीखे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर लगे हैं।


प्रवेशोत्सव के बीच शिक्षकों को दूसरे कार्यों में उलझाना शिक्षा के निजीकरण का षडय़ंत्र है। शिक्षा अधिकारियों का मौन रहना सार्वजनिक शिक्षा की बर्बादी का संकेत है। कक्षा कक्ष से शिक्षक को दूर कर सरकारी स्कूलों को बदनाम कर बर्बाद किया जा रहा है समाज को चिंतन की आवश्यकता है।-उपेंद्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत।


प्रवेशोत्सव के बीच शिक्षकों को अन्य कार्यो में लगाने से स्कूलों में नामांकन व शिक्षण दोनों प्रभावित हो रहा है। सरकारी स्कूलों में व्यस्था सुधार के लिए शिक्षकों को गैर शैक्षिक कार्य से मुक्त रखना चाहिए।-सुरेश कुमार, जिलाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ (अंबेडकर)


जुलाई -अगस्त में नामांकन अभियान चलता है। इस दौरान अध्यापक विद्यालय में अध्यापन नहीं करवा कर प्रशिक्षण में चले जाएंगे तो नामांकन प्रभावित होगा। विभाग को चाहिए कि सभी प्रकार के प्रशिक्षण सितम्बर से पहले नहीं हो। सरकार को इस मामले में व्यावहारिक रुप स चिन्तन कर फैसला लेना चाहिए।-राजपाल भूकर, जिला मंत्री रेसा -प्रधानाचार्य



स्कूल में प्रवेशोत्सव, शिक्षक देखेंगे ओलंपिक व युवा महोत्सव Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP BASIC NEWS

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