ऑन लाइन अंकतालिका के अभाव में सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए परेशान हो रहे विद्यार्थी
भरतपुर. स्कूलों में विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया का दौर शुरू हो गया है। बच्चे अपने पसंद के स्कूल में प्रवेश के लिए स्कूलों का चयन कर रहे हैं, लेकिन सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों के आरटीई पोर्टल में कुछ अंतर होने के कारण स्कूली बच्चों को खासकर सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक सरकारी स्कूलों के आरटीई पोर्टल पर विद्यार्थियों के प्रवेश, अंकतालिका, टीसी आदि संबंधी सभी कार्य करने की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है, लेकिन निजी विद्यालयों के आरटीई पोर्टल पर अंक तालिका तैयार करने का ऑफ्शन ही नहीं है।
इस वजह से निजी विद्यालय से जब कोई विद्यार्थी टीसी कटवाता है तो उसे टीसी तो ऑनलाइन वाली मिल जाती है, लेकिन अंक तालिका ऑफ लाइन वाली हस्तलिखित तैयार की हुई ही दी जाती है। सरकारी स्कूल में प्रवेश में खासकर 9वीं और 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों को ही आ रही है। जब वे सरकारी स्कूल में 10वीं और 12वीं कक्षा में प्रवेश लेने पहुंचते हैं तो वहां उनसे ऑन लाइन वाली अंकतालिका मांगी जा रही है, लेकिन निजी स्कूल की ओर से उन्हें ऑफ लाइन वाली अंकतालिका ही दी जा रही है।
ऐसे में छात्र-छात्रा प्राइवेट और सरकारी स्कूल के चक्कर काटते-काटते फुटबॉल बन रहे हैं। ऐसी परेशानी किसी एक विद्यार्थी के सामने नहीं अपितु सैकड़ों बच्चों के सामने आ रही है। बहुत से बच्चे तो हारकर फिर से किसी निजी विद्यालय में प्रवेश लेने को मजबूर हो रहे हैं। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि जहां एक ओर सरकार अपने सरकारी स्कूलों में नामांकन संख्या बढ़ाने के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, प्रवेशोत्सव मना रही है, लेकिन यहां हालात बदतर देखे जा रहे हैं। प्रवेश के लिए स्कूल पहुंच रहे बच्चों को प्रवेश न देकर वापस लौटाया जा रहा है।
ऑफ लाइन अंक तालिका से प्रवेश लेने से इंकार करना गलत
इस संबंध में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रेम सिंह कुंतल का कहना है कि ऑफ लाइन अंकतालिका से प्रवेश लेने से इंकार नहीं किया जा सकता। यदि कोई सरकारी स्कूल ऑन लाइन अंकतालिका के अभाव में प्रवेश लेने से इंकार कर रहा है तो गलत है। यदि इस प्रकार की किसी स्कूल की शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी। रही बात निजी स्कूलों के आरटीई पोर्टल पर अंक तालिका का ऑफ्शन नहीं होने की, यह स्टेट लेबल का मुद्दा है, इसके लिए हम एनआईसी से अनुशंसा करेंगे, ताकि पोर्टल में अंक तालिका तैयार करने का ऑफ्शन बढ़ाया जा सके।

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