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सोमवार, 3 जुलाई 2023

OPS: प्रदेश के नौ हजार अनुदानित स्कूल व कॉलेज के कर्मचारियों को ओपीएस का इंतजार



OPS: प्रदेश के नौ हजार अनुदानित स्कूल व कॉलेज के कर्मचारियों को ओपीएस का इंतजार

सीकर. प्रदेश में पिछले साल सरकार ने भले ही एनपीएस को खत्म कर ओपीएस को लागू कर मास्टर स्ट्रोक लगा दिया हो। लेकिन अनुदानित शिक्षण संस्थाओं के कर्मचारियों का दर्द अभी तक कम नहीं हुआ है। कर्मचारियों का तर्क है कि सरकार ने जब पिछले साल एनपीएस को खत्म कर सरकारी कर्मचारियों के साथ विवि, बिजली कंपनी व रोडवेज कर्मचारियों को इसके दायरे में ले लिया तो फिर अनुदानित संस्थाओं के कर्मचारियों को क्यों बाहर रखा गया है। इस मामले में पिछले 11 साल से अनुदानित संस्थाओं के कर्मचारी न्याय की जंग लड़ने पर मजबूर है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार ने ओपीएस का तोहफा प्रथम नियु क्ति ति थि से नहीं दिया तो ओपीएस की घोषणा का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।


केस एक: पुराने नियमों से सेवा ज्यादा, नए से कम

समायोजित शिक्षाकर्मियों को वर्ष 2011 में राजकीय सेवा में समायोजित किया गया था। इनमें से सैकड़ों कर्मचारी ऐसे है जिनकी सेवा अवधि दस साल से कम हो गई। जबकि उनकी कुल सेवा अवधि 25 साल से भी अधिक है। ऐेसे कर्मचारियों को भी पेंश्न स्कीम का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।


केस दो: कटौती का पूरा पैसा देने को तैयार, फिर भी पेंशन नहीं

राजस्थान स्वैच्छिक ग्रामीण सेवा के नियम 2010 के तहत कर्मचारियों के वेतन व भत्ते आदि का निर्धारण किया गया है। इस मामले में कर्मचारियों का कहना है कि कटौती का पूरा पैसा देने को वह तैयार है और राज्य सरकार पर तुरंत वित्तीय भार भी नहीं पड़ने वाला फिर भी इन कर्मचारियों को प्रथम नियुु क्ति से ओपीएस से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण शिक्षा सेवा में लेने का उद्देश्य था कि कर्मचारियों को कल्याण करना था, लेकिन सेवा नियम इस प्रकार बनाए कि उनका गला घोंट दिया गया।


जीवन के आखिरी पड़ाव में संघर्ष

समायोजित शिक्षाकर्मियों का कहना है कि सिविल पेंशन योजना 1996 के नियम 14(2) में प्रावधान है कि अनुदानित शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों का समायोजन किया जाता है तो उनकी जमा सीपीएफ की रा शि ब्याज सहित लेकर उन्हें पुरानी पेंशन दे दी जाएगी। लेकिन राज्य सरकार जानबूझकर इस प्रावधान की अनदेखी कर रही है। पहले समायोजन के लिए सात से आठ साल संघर्ष करना पड़ा। सरकार ने वर्ष 2011 में समायोजित कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से अब यदि ओपीएस लागू किया जाता है तो बुढ़ापे के संघर्ष से मुक्ति मिल सकती है। वहीं कर्मचारियों ने दस साल की न्यूतनम सेवा के मामले में न्यायालय के फैसले के अनुरूप प्रथम नियु क्ति से सेवा अव धि गणना की की मांग रखी है।


एक्सपर्ट व्यू...

सरकार को अनुदानित शिक्षाकर्मियों को भी ओपीएस के दायरे में लाना चाहिए। इन कर्मचारियों के पक्ष में न्यायलय का फैसला भी आ चुका है। इसके बाद भी सरकार की ओर से लाभ से वंचित किया जा जा रहा है।-डॉ. एमसी मालू, सदस्य, विधि कमेटी


यह मामला वित्त विभाग से जुड़ा है। इस मामले में निर्णय वित्त विभाग ही लेगा।-बी. डी कल्ला, शिक्षामंत्री

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