शिक्षण संवर्धन कार्यक्रमों की प्रभावी मॉनिटरिंग की आवश्यकता
बामनवास राजस्थान सरकार की ओर से विजन 2030 को लेकर सरकारी अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक संगठन एवं अन्य प्रबुद्ध नागरिकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। इसके लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर बैठकों का दौर जारी है। शिक्षा विभाग के ब्लॉक स्तरीय प्रतिनिधि के रूप में सीबीईओ घनश्याम लकवाड़ द्वारा इस संबंध में अपने सुझाव उच्च अधिकारियों को भिजवाते हुए बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा शैक्षिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने वास्ते विभिन्न प्रयास किए गए है।
हाल ही में हाल ही में आई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शैक्षिक व्यवस्था के ढांचे में विभिन्न परिवर्तन किए गए हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बुनियादी शिक्षा पर महत्वपूर्ण जोर दिया गया है। यदि हम राजस्थान के संदर्भ में इस स्थिति को देखें तो वर्तमान समय में हमें बाल्यावस्था शिक्षा पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। विद्यालयों में कुछ ही समय में बाल वाटिका संचालित होने वाली है। लेकिन हमारे अधिकतर विद्यालयों में बाल वाटिका के लिए आकर्षक कक्षा कक्ष नहीं है। यदि ऐसे कक्षा कक्ष बन जाए जहां आते ही छोटे बच्चों को एक अलग ही प्रेरणादायक माहौल पर मिले। जो खिलौने से सुसज्जित हो, समृद्ध प्रिंट वातावरण वाली पुस्तक वहां पर उपलब्ध हो।
गतिविधि करवाने के लिए भरपूर मात्रा में शिक्षण अधिगम सामग्री उपलब्ध हो तो बाल वाटिका और अधिक प्रासंगिकता के साथ नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को मजबूत करती हुई दिखाई देगी। सीबीईओ ने विभागीय सुझावों में हाल ही में संचालित राजीव गांधी ग्रामीण ओलंपिक खेलों में हमारी प्रतिभाओं को तराशने और निखारने का बखूबी कम कर रहे हैं। खेलों को और अधिक बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक स्कूल स्तर पर आयु अनुरूप ऐसे खेल कक्षा होने चाहिए। जहां पर बालक आयु स्तर के अनुसार खेल सके। सरकार द्वारा शिक्षण संवर्धन के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। लेकिन मॉनिटरिंग के अभाव में जमीनी स्तर तक पहुंच नहीं पाते हैं। इसलिए प्रभावी मॉनिटरिंग के कड़े नियम बनाए जाने की आवश्यकता है।

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