सरकारी स्कूल के शिक्षकों को ऐसे उलझाया, अध्यापन को भूल रहे!
सिरोही. शिक्षक का नाम जेहन में आते ही ऐसे व्यक्ति की छवि बनती है, जो विद्यार्थियों को स्कूल में अध्ययन करवाते हैं। लेकिन, वास्तव में देखे तो बड़ी संख्या में सरकारी शिक्षक शिक्षण के बजाय गैर शैक्षणिक कार्यो ं में ही व्यस्त रहते हैं। इस सत्र के जुलाई व अगस्त में 50 से अधिक कार्यो ं में व्यस्त रहे हैं। शिक्षण तो उन कार्यो ं से समय मिलने पर करवा सके हैं।
गैर शैक्षणिक कार्यो ं के अलावा ग्रामीण व शहरी ओलम्पिक और विद्यालयी खेलकूद भी शिक्षकों के कंधों पर ही है। शिक्षक संगठनों के अनुसार तीन से चार दर्जन तरह की गतिविधियां एवं कार्यों की जिम्मेदारी शिक्षकों पर हैं। इनमें करीब आधी तो ऐसी हैं, जिनका अध्यापन कार्य व विद्यार्थियों से सीधा कोई वास्ता नहीं है।
ये कार्य जो शिक्षकों से करवाए गए
एफएलएन प्रशिक्षण, आईपीआर अचल संपत्ति, एसीआर व्याख्याता व वरिष्ठ अध्यापक, अध्यापक अस्थाई वरीयता सूची आपत्ति, आइसीटी लैब, ब्रॉड बैंड कनेक्शन, आरकेएसएमबीके, नवोदय आवेदन, इंस्पायर अवार्ड, संविधान की शपथ, अब्दुल कलाम व्यक्तित्व विकास योजना, शक्ति दिवस कार्यक्रम, पीएमश्री आवेदन, उड़ान सेनिटरी नेपकिन योजना, एनआइपीएल, मोबाइल वितरण योजना, डिजिटल प्रवेशोत्सव, विधानसभा प्रश्न, हर विद्यार्थी एक पौधा योजना, पालनहार योजना, आपकी बेटी योजना, राजश्री, यशस्वी योजना, दीक्षा पर कॉइन एकत्रित करो योजना, विफ्स टेबलेट वितरण योजना, विभिन्न कमेटी गठन, वर्कबुक प्रिंटिंग व वितरण, रंगोत्सव, आधार व जनाधार ऑथेंटिकेशन आदि।
गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति मिले
शिक्षकों का मूल कार्य अध्यापन है। वर्तमान में शिक्षकों के जिम्मे इतने गैर शैक्षणिक कार्य है कि पढ़ाने के लिए समय कम मिल पाता है। गैर शैक्षणिक कार्यों से अध्ययन बाधित होता है। सरकार से हम लगातार मांग कर रहे हैं कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए। जबकि सरकार गैर शैक्षणिक कार्य बढ़ाती जा रही है।बसन्त कुमार ज्याणी, प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा
ऐसे कार्य, जिनका अध्ययन से नहीं नाता
हाउस होल्ड सर्वे, महंगाई राहत शिविर, प्रशासन गांवों के संग शिविर, युवा महोत्सव, एफएलएन व प्रधानाचार्य प्रशिक्षण, आइपीआर अचल सम्पत्ति, मतदाता जागरूकता, दूध वितरण, मोबाइल वितरण, सड़क सुरक्षा, संविधान की शपथ, आधार ऑथेंटिकेशन, जनाधार ऑथेंटिकेशन आदि।

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